Sawan 2023: सावन में शिव को कैसे करें प्रसन्न?
Sawan 2023: श्रावण मास भगवान शिव का अत्यंत प्रिय मास होता है। इस महीने में भक्त अपनी श्रद्धानुसार शिवजी का अभिषेक, पूजन, मंत्र जाप आदि करके उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। वैसे तो शिवजी मात्र जल अर्पित कर देने से ही प्रसन्न होने वाले देव हैं किंतु उनके लिए कुछ विशेष उपाय भी करना चाहिए जो मनुष्य को शिव पद प्रदान करते हैं।

शिव महापुराण की विद्येश्वर संहिता के 11वें अध्याय में शिवलिंग की स्थापना, उसके लक्षण और पूजन की विधि का वर्णन मिलता है। इसके साथ ही शिवपद की प्राप्ति कराने वाले अनेक सत्कर्मों का भी विस्तार से वर्णन मिलता है। श्लोक क्रमांक 42 से 54 में ऐसे अनेक उपाय बताए गए हैं। आइए जानते हैं क्या कहता है शिव महापुराण।
ऊं नम: शिवाय का नित्य जप करना चाहिए
शिव महापुराण कहता है द्विजों अर्थात् ब्राह्मणों को शिव के मंत्र नम: शिवाय या ऊं नम: शिवाय का नित्य जप करना चाहिए। द्विजेत्तरों अर्थात् जो ब्राह्मण नहीं हैं उन्हें अंत में नम: लगाकर शिवाय नम: का जन करने के निर्देश दिए गए हैं।
- द्विजानां च नम: पूर्वमन्येषां च नमोन्तकम् ।
- स्त्रीणां च केचिदिच्छन्ति नमोन्तं च यथाविधि ।।
यह हैं निर्देश
- शिव महापुराण के अनुसार शिव पंचाक्षर मंत्र ऊं नम: शिवाय का पांच करोड़ जप करने से मनुष्य सदाशिव के समान हो जाता है।
- एक, दो, तीन या चार करोड़ जप करने से मनुष्य क्रमश: ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र तथा महेश्वर का पद प्राप्त कर लेता है।
- मंत्र में जितने अक्षर हों उनका अलग-अलग एक-एक लाख जप या समस्त अक्षरों की जितनी संख्या हो उतने लाख जाप करने से शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त हो जाती है। मंत्र में पांच अक्षर हैं तो पांच लाख जाप।
- यदि एक हजार दिनों में प्रतिदिन एक सहस्र (हजार) जप के क्रम से पंचाक्षर मंत्र का दस लाख जप पूरा कर लिया जाए और प्रतिदिन ब्राह्मण भोजन कराया जाए तो उस मंत्र से अभीष्ट कार्य की सिद्धि होती है।
- ब्राह्मण को प्रतिदिन प्रात:काल एक हजार आठ बार गायत्री का जप करना चाहिए। गायत्री से भी शिव पद की प्राप्ति हो जाती है।
- एकाक्षर मंत्र दस हजार, दशार्ण मंत्र एक हजार, सौ से कम अक्षर वाले मंत्र एक सौ और उससे अधिक अक्षर वाले मंत्र यथाशक्ति एक से अधिक बार जपने चाहिए।
- वेदों के पारायण को भी शिव पद की प्राप्ति कराने वाला कहा गया है।
- ऊं का प्रतिदिन एक हजार जप करना चाहिए। ऐसा करने पर शिव समस्त मनोरथों की सिद्धि प्रदान करते हैं।
- जो मनुष्य भगवान शिव के लिए बाग-बगीचे, फुलवाड़ी लगाता है, शिव की सेवा के लिए मंदिर को झाड़ने बुहारने का काम करता है वह शिव पद प्राप्ति का अधिकारी हो जाता है।












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