अगर चाहिए पिया का प्यार तो जरूर कीजिए मंगला-गौरी का व्रत
नई दिल्ली। सावन मास में आने वाला व्रत काफी महत्वपूर्ण होता है, सावन के सोमवार के दूसरे दिन मंगला-गौरी का व्रत होता है, जिसे सुहागिन औरतें करती हैं। मां पार्वती की अराधना वाला ये व्रत बेहद ही फलदायी है। कहते हैं जिनके वैवाहिक जीवन में कष्ट चल रहा है या फिर जिनके विवाह में देर हो रही है या जिन्हें पति सुख नहीं मिल रहा है, उन्हें जरूर ये व्रत करना चाहिए। मां पार्वती बेहद ही सरस रूप वाली हैं और उनकी कृपा से जातक के हर तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं।

खास बात
मंगला गौरी का व्रत सावन के हर मंगलवार को पड़ता है और इसी कारण सावन में सोमवार के अलावा मंगलवार का भी काफी महत्वपूर्ण स्थान है।
कैसे करें व्रत
- नित्य कर्मों से निवृत्त होकर साफ-सुथरे धुले हुए वस्त्र धारण करना चाहिए।
- इस व्रत में एक ही समय अन्न ग्रहण करके पूरे दिन मां पार्वती की आराधना की जाती है।
- मां मंगला गौरी का एक चित्र अथवा प्रतिमा लें।

मंत्रों का जाप
- 'मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये' श्लोक से पूजा कीजिए।
- मंगला गौरी की प्रतिमा के सामने एक घी का दीपक (आटे से बनाया हुआ) जलाएं, दीपक ऐसा हो, जिसमें सोलह बत्तियां लगाई जा सकें।
- माता के पूजन के लिए सभी चीजें 16 होनी चाहिए।
- पूजन के बाद मंगला गौरी की कथा सुनी जाती है।

कथा
एक शहर में धरमपाल नाम का एक व्यापारी रहता था। उसकी पत्नी खूबसूरत थी और उनके पास बहुत सारी धन-दौलत थी। लेकिन उनको कोई संतान नहीं थी, इस वजह से पति-पत्नी दोनों ही हमेशा दुखी रहते थे। फिर ईश्वर की कृपा से उनको पुत्र प्राप्ति हुई, लेकिन वह अल्पायु था। उसे यह श्राप मिला हुआ था कि सोलह वर्ष की उम्र में सर्प दंश के कारण उसकी मौत हो जाएगी। संयोग से उसकी शादी सोलह वर्ष से पहले ही एक युवती से हुई, जिसकी माता मंगला गौरी व्रत किया करती थी, उसने अपनी पुत्री के लिए एक ऐसे सुखी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त किया था, जिसके कारण वह कभी विधवा नहीं हो सकती। इसी कारण धरमपाल के पुत्र ने 100 साल की लंबी आयु प्राप्त की।












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