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Saphala Ekadashi 2025: क्या है सफला एकादशी की कथा? आज भूलकर भी ना करें ये काम वरना होगा विनाश

Saphala Ekadashi 2025: आज पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी कि सफला एकादशी का व्रत है। यह उपवास भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और कथा श्रवण करने से जीवन की असफलताएं दूर होती हैं , व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और वो हर क्षेत्र में काफी सफल होता है। जो इंसान आज भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उन्हें दोहरे फल की प्राप्ति होती है।

Saphala Ekadashi 2025 व्रत कथा

प्राचीन काल की बात है। चम्पावती नगरी में महिष्मान नामक एक प्रतापी राजा राज्य करता था। उसके चार पुत्र थे। सबसे बड़ा पुत्र लुम्पक अत्यंत दुराचारी, क्रूर और अनैतिक प्रवृत्ति का था। वह जुआ, चोरी और परस्त्रीगमन जैसे कुकर्मों में लिप्त रहता था।

Saphala Ekadashi 2025

भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है पीपल का वृक्ष

राजा उसके आचरण से अत्यंत दुःखी हुआ और अंततः उसे राज्य से निष्कासित कर दिया। राज्य से निकाले जाने के बाद लुम्पक जंगल में रहने लगा। भूख और कष्टों से पीड़ित होकर वह चोरी करने लगा। एक दिन वह जंगल में एक विशाल पीपल के वृक्ष के नीचे बैठ गया, जो भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।

अनजाने में ही सफला एकादशी का व्रत कर लिया

संयोगवश उसी दिन पौष कृष्ण एकादशी थी। भूख के कारण वह कुछ खा नहीं सका और अनजाने में ही उसका एकादशी का उपवास हो गया। रात्रि में ठंड से बचने के लिए वह पीपल के वृक्ष के नीचे ही पड़ा रहा। अगले दिन द्वादशी को उसने कुछ फल खाए और जल पिया। इस प्रकार अनजाने में ही उसने सफला एकादशी का व्रत कर लिया। इस व्रत के प्रभाव से उसके पाप नष्ट होने लगे।

लुम्पक ने आगे चलकर धर्मपूर्वक शासन किया

कुछ समय बाद राजा महिष्मान शिकार करते हुए उसी जंगल में पहुंचा और अपने पुत्र लुम्पक को पहचान लिया। राजा ने देखा कि अब लुम्पक के स्वभाव में परिवर्तन आ गया है। वह पश्चाताप से भरा हुआ और शांत स्वभाव का हो गया था। लुम्पक ने अपने पिता से क्षमा मांगी और राजा को अपनी दुर्दशा का कारण बताया। भगवान विष्णु की कृपा से राजा ने उसे पुनः राज्य में स्थान दिया। लुम्पक ने आगे चलकर धर्मपूर्वक शासन किया और जीवन के अंत में वैकुंठ धाम को प्राप्त हुआ।

Saphala Ekadashi 2025

Saphala Ekadashi 2025 का व्रत बहुत ही नियम से करने चाहिए

वैसे तो सफला एकादशी का व्रत बहुत ही सिंपल है लेकिन इसके रखने के कुछ नियम है., जिनका पालन बेहद आवश्यक है, जो लोग ध्यानपूर्वक पूजा नहीं करते हैं, उन्हें फिर पूजा का सही फल नहीं मिलता और तो और उन्हें परेशानियां झेलनी पड़ती है।

Saphala Ekadashi 2025 व्रत में क्या करें

  • एकादशी तिथि के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
  • यदि निर्जल व्रत संभव न हो तो फलाहार या केवल जल लेकर व्रत करें। व्रत में शुद्धता बनाए रखें।
  • सफल एकादशी व्रत कथा सुनने या पढ़ने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
  • गरीबों, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
  • अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक व्रत खोलें।

Saphala Ekadashi 2025 व्रत में क्या न करें (Don'ts)

  • व्रत के दिन मांस, मछली, अंडा, शराब और लहसुन-प्याज का सेवन न करें।
  • एकादशी के दिन चावल और अनाज का सेवन वर्जित माना गया है।
  • व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म से शुद्धता बनाए रखें।
  • किसी की बुराई करना या अपमानजनक शब्द बोलना व्रत के फल को कम कर सकता है।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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