दुनिया का इकलौता मंदिर, जहां माता अंजनी हैं न्यायाधीश, लगती है देवताओं की कचहरी
श्रीराम जानकी के परम भक्त श्रीहनुमान जी के मंदिर तो देश में हर जगह मौजूद हैं, लेकिन उनकी माता अंजनी के मंदिर बहुत कम ही हैं। सागर में माता अंजनी का एक अनूठा मंदिर हैं, जहां वे न्यायाधीश के रुप में विराजमान हैं। मान्यता है कि यहां भक्तों के दुखों को हरने, परेशानियों, मुसीबत और संकट को दूर करने के लिए आधी रात को देवताओं की कचहरी लगती है। इस दौरान यहां इंसानों का प्रवेश वर्जित रहता है। मंदिर कई सदी पुराना है, यह 'कचेहरन खेर माई' मंदिर नाम से प्रसिद्ध है। कई लोग और परिवार माता को कुलदेवी के लिए रुप में पूजते हैं। संभाग में यह इकलौता मंदिर है जहां हनुमानजी अपनी माता अंजनी के साथ विराजमान हैं। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि यहां लोग अर्जी लगाते हैं। अर्जियों पर विचार करने रात के वक़्त देवताओं की कचहरी लगती है। श्रीराम भक्त हनुमानजी महाराज की माता अंजनी यहां न्यायाधीश के रुप में विराजमान रहती हैं।

कचेरन खेर माता मंदिर, यहां हनुमानजी माता के साथ विराजे हैं
सागर में राजघाट रोड से जैसीनगर मार्ग पर कचेरन खेर माता मंदिर मौजूद है। इस मंदिर में मां अंजनी अपने पुत्र हनुमानजी के बाल स्वरुप के साथ विराजमान हैं। माता और पुत्र की मूर्तियां एक साथ गर्भगृह में स्थित हैं और एक साथ पूजन होता है। इस स्थान पर मन्नत लेकर जबलपर, छतरपुर, सागर, बीना, देवरी तक से लोग पहुंचते हैं। नवरात्रि में माता के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

आधी रात में लगती है देवताओं की कचहरी, इंसानों का प्रवेश प्रतिबंधित
मंदिर के पुजारी द्वारिका प्रसाद तिवारी बताते हैं, इस मंदिर की पूजा उनके पूर्वज करते आये हैं वे अब सातवी पीढ़ी के रूप में मंदिर की पूजा कर रहे हैं। माँ अंजनी के मंदिर के भक्त कोर्ट कचहरी संबंधी अर्जियां लेकर आते हैं और माँ के आशीर्वाद से उन्हें कचहरी के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलती हैं। मंदिर से दूर-दूर से भक्त अपनी कोर्ट कचहरी संबंधी समस्याएं लेकर आते हैं और फिर माँ सही गलत के आधार पर भक्तों को कचहरी से मुक्ति दिलाती हैं।

माता अंजनी ने बुजुर्ग को सपने में बताया था कहां विराजी हैं
माता अंजनी ने बुजुर्ग को सपने में बताया था कहां विराजी हैं। गांव के एक व्यक्ति को माता ने स्वप्न दिया था। बताई हुई जगह से मूर्ति मिली, जिसके बाद ग्रामीणों ने मंदिर निर्माण किया, लेकिन अधूरे निर्माण वाला यह मंदिर जंगली इलाके से घिरा हुआ है। तो वहीं मंदिर का एक बड़ा भाग आज भी मैदान की तरह है, मानो यहां बस्ती रही हो। बाकी हर तरफ झाड़ियां और जंगल हैं। वर्तमान में यह मंदिर चमत्कारिक रूप से आस्था का केंद्र है। माना जाता है कि यहां कोर्ट कचहरी संबंधी अर्जियां लेकर जाने वाले भक्तों की सुनवाई देवतागण रात में अपनी अलौकिक ताकतों की कचहरी लगाकर करते हैं एवं माँ अंजनी न्यायधीश बनकर भक्तों का कष्ट निवारण करती हैं।

कचेरा जाति के कबीले की बस्ती कभी यहां हुआ करती थी
कचेहरन माता मंदिर के नाम को लेकर एक इतिहास और है जो इसकी प्राचीनता का प्रमाण देता है। नाम के अनुरूप कचेरन खेर माता मंदिर की स्थापना लाख व चूड़ियों के कारीगरों से जुड़ी मानी जाती है। इसमें कचेरा जाति के कबीले कभी इस जगह निवास करते थे जो लखेरा, लखेर, कचेरा, कचेर के जाति समूह से आते हैं। लेकिन कालांतर में वे यहां से पलायन कर गए। उनके जाने के बाद यहां वीरान हो गया।

माता ने सपने में बताया था, पहाड़ी इलाके में कहां विराजी हैं
करैया गांव के बुजुर्ग व्यक्ति बताते हैं कि मंदिर सैकड़ो वर्ष पुराना हैं, गांव के प्रजापति परिवार में एक बुजुर्ग को माँ ने सपना देकर इस स्थान पर अपने लोपित अवस्था मे स्तिथ होने के संकेत दिए थे, जिसके बाद उन्होंने जमीन से माँ की मूर्ति निकालकर मूर्ति की स्थापना कराई थीं। सूरज सिंह, करैया, चाली, गांव के बुजुर्ग, मोहन सिंह, सूरत सिंह ठाकुर ने बताया कि यहां मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पेशी करनी होती है समय समय पर हाजिरी लगाते हैं। रात के समय यहां अजीब घटनाएं होती हैं जब देवताओं की कचहरी लगती है तब किसी का भी जाना वर्जित होता। यदि कोई पहुंच जाता है तो किसी न किसी तरह उसे लौटना ही पड़ता है।












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