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आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है ध्वज

नई दिल्ली। भारत की सनातन संस्कृति में प्रतीक चिन्हों का बड़ा महत्व है। प्रतीक चिन्हों में सबसे महत्वपूर्ण होते हैं ध्वज और पताका। ध्वज और पताका को हम सामान्य भाषा में झंडा कह सकते हैं लेकिन ये होते अलग-अलग हैं। पताका त्रिकोणाकार होती है जबकि ध्वज चतुष्कोणीय होता है। प्राचीन काल में प्रत्येक घर के ऊपर ध्वज लगाने की परंपरा रही है, लेकिन अब यह परंपरा केवल मंदिरों तक सिमटकर रह गई है। हमारे ऋषि मनीषियों ने कोई भी परंपरा यूं ही नहीं बनाई, उसके पीछे एक गूढ़ रहस्य, तर्क और विज्ञान छुपा हुआ है, ध्वजा लगाने के अपने नियम और लाभ होते हैं।

भगवा ध्वज

भगवा ध्वज

हिंदू परंपरा में भगवा ध्वज लगाने का महत्व है। दरअसल भगवा, केसरिया या सिंदूरी रंग ऊर्जा, शौर्य, आध्यात्मिकता, सात्विकता का प्रतीक है। इसमें सूर्य का तेज समाया हुआ है। महाभारत के युद्ध में भी अर्जुन के रथ पर भगवान कृष्ण ने केसरिया ध्वज लगवाया था, जिस पर प्रतीक के रूप में हनुमानजी का चित्र अंकित था। वेद, उपनिषद, पुराण श्रुति भी ध्वज का महत्व बताते हैं। संतगण इसकी ओंकार, निराकार या साकार की तरह पूजा अर्चना करते हैं। यही कारण है कि देवस्थानों पर सिंदूरी रंग के ध्वज का ही प्रयोग होता है। किसी भी शुभ कार्य में ध्वज लगाने की परंपरा भी रही है। चाहे गृह प्रवेश हो, पाणिग्रहण संस्कार हो या अन्य कोई हिंदू रीति-रिवाज, पूजा पर्व, उत्सव हो घर के शिखर पर ध्वजा फहराई जाती है। ध्वजा का महत्व केवल हिंदू पूजा पद्धति में ही नहीं है, बल्कि यह वास्तु दोष दूर करके घर को नकारात्मक शक्तियों से बचाने का कार्य भी करता है।

ध्वजा फहराने के लाभ

ध्वजा फहराने के लाभ

वास्तु पुरुष सिद्धांत के अनुसार घर की छत जातक की कुंडली का बारहवां भाव कहलाती है। इस भाव से व्यक्ति के खर्च, आर्थिक नुकसान, धन हानि और शैय्या सुख देखा जाता है। कालपुरुष सिद्धांत के अनुसार कुंडली के बारहवें भाव में बुद्ध और राहू बुरा प्रभाव देते हैं। दूसरी ओर केतू और शुक्र बारहवें भाव में सर्वश्रेष्ठ प्रभाव देते हैं। कभी-कभी जातक के जीवन में ऐसी स्थिति आ जाती है जिससे आर्थिक समस्याओं और दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति कुंडली में राहू केतू शनि और मंगल के कारण आती है। ऐसी स्थिति में यदि घर की छत पर केसरिया ध्वजा लगाई जाए तो बुरे ग्रहों के दोष समाप्त हो जाते हैं।

विजय का प्रतीक है ध्वज

विजय का प्रतीक है ध्वज

  • ध्वजा को सकारात्मकता और विजय का प्रतीक माना गया है। इसीलिए प्राचीनकाल से युद्ध के बाद विजय पताका फहराने की परंपरा रही है।
  • वास्तु के अनुसार ध्वजा को शुभता का प्रतीक माना गया है। घर की छत पर ध्वजा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। घर बुरी नजर से बचा रहता है।
  • घर के उत्तर-पश्चिम कोने में यदि ध्वजा लगाई जाए तो यह वास्तु की दृष्टि से अत्यंत शुभ होता है। इससे उत्तर-पश्चिम दिशा से संबंधित समस्त वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। उत्तर-पश्चिम दिशा यानी वायव्य कोण राहु की दिशा होती है। वैदिक ज्योतिष में राहु को शोक, दोष का कारक ग्रह माना गया है। यदि इस कोने में ध्वजा लगाई जाए तो राहु की भी शांति हो जाती है।
  • भगवान विष्णु के लिए पीली, मां लक्ष्मी और दुर्गा के लिए लाल रंग की ध्वजा लगाई जाती है। शैव परंपरा को मानने वाले केसरिया ध्वजा लगाते हैं।

सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता

सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता

  • घर के भीतर उत्तर-पूर्व दिशा में केसरिया ध्वज लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के मंदिर में सफेद रंग की चमकीली पताका लगवाने से आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार आता है।
  • हनुमान जयंती या मंगलवार, शनिवार के दिन हनुमान मंदिर पर लाल रंग की पताका लगवाने से समस्त संकटों से रक्षा होती है। शत्रु शांत होते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और रोगों से मुक्ति मिलती है।

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