Ravi Pradosh Vrat 2025: सारे रोग दूर करेगा रवि प्रदोष, भोलेनाथ की कृपा से संवरेगा जीवन

Ravi Pradosh Vrat 2025: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत आज है, रविवार होने से रवि प्रदोष का संयोग बना है। रवि प्रदोष का महत्व रोग निवारण में अधिक होता है। रवि प्रदोष का व्रत करने से और इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से कठिन से कठिन और जीर्ण रोगों से भी मुक्ति मिलती है। व्यक्ति का मान-सम्मान बढ़ता है और वह सफलता की सीढ़ियां चढ़ता जाता है।

क्या विशेष उपाय करें

रवि प्रदोष का व्रत नियमानुसार रखना चाहिए किंतु जो लोग यह व्रत नहीं रख पाते वे इस दिन कुछ विशेष उपाय करें। जिनसे उनको जीर्ण रोगों से मुक्ति मिलेगी।

Ravi Pradosh Vrat 2025

Ravi Pradosh Vrat के दिन 5 मिट्टी के कलश लेकर आएं

यदि घर में किसी को कैंसर, हृदय, बीपी, लिवर, किडनी के कठिन रोग हैं और लाख दवा कराने के बाद भी ठीक नहीं हो पा रहे हैं तो एक बार रवि प्रदोष के दिन यह उपाय करके देखिए। रवि प्रदोष के दिन पांच मिट्टी के ढक्कन वाले कलश लेकर आएं। कलश छोटे आकार के होने चाहिए। इन कलशों में गेहूं, लाल चंदन के टुकड़े, तांबे के चौकोर टुकड़े रखें। अब इन कलशों के मुंह मिट्टी के ढक्कन से बंद करके उन्हें लाल कपड़े से बांध दें।

भगवान शिव से रोग मुक्ति की प्रार्थना करें

इन कलशों का पूजन करें। रोगी स्वयं पूजन कर सके तो अच्छा है वरना परिवार का कोई सदस्य इनका पूजन करें। इसके बाद भगवान शिव से रोग मुक्ति की प्रार्थना करें और इन कलशों को किसी जल में जाकर प्रवाहित कर आएं। रोगी शीघ्र ही ठीक होने लगेगा।

रवि प्रदोष के दिन महामृत्युंजय मंत्र के जाप करवाएं

रोगी के नाम से रवि प्रदोष के दिन महामृत्युंजय मंत्र के जाप करवाएं। कम से कम 1008 जप अवश्य करें और प्रत्येक मंत्र के साथ एक बिल्वपत्र और लौंग शिवजी को अर्पित करते जाएं। इसके बाद शिवलिंग से थोड़ा सा जल लेकर इस जल को रोगी के पूरे शरीर पर लगा दें। इससे रोग मुक्ति होने लगेगी।

कच्चा दूध और फिर गंगाजल से स्नान करवाएं (Ravi Pradosh Vrat)

रवि प्रदोष के दिन सफेद आंकड़े के पौधे की जड़ लेकर आएं। इसे गंगाजल, कच्चा दूध और फिर गंगाजल से स्नान करवाएं और पूजन करें। इस जल को सफेद कपड़े में बांधकर चांदी के ताबीज में भरकर पहनने से रोग दूर हो जाते हैं और नए रोग पास नहीं आते हैं।

पांच मुख वाला दीपक मेनडोर पर जलाएं (Ravi Pradosh Vrat)

रवि प्रदोष के दिन पांच मुख वाला दीपक सायंकाल प्रदोष काल में अपने घर के मुख्य द्वार पर लगाना चाहिए। यह पांच मुखी दीपक शिवजी के पांच मुखों का प्रतिनिधित्व करेगा। इससे आपके घर में रोग प्रवेश नहीं कर पाएंगे और कोई रोगी है तो उसका रोग दूर होगा।

बड़, पीपल और नीम की त्रिवेणी की पूजा करें

रवि प्रदोष के दिन जहां बड़, पीपल और नीम की त्रिवेणी हो वहां जाकर इनका पूजन करें। 11 परिक्रमा करते हुए इन पर कच्चा सूत लपेटें और फिर कच्चे दूध, जल और तिल मिश्रित जल से इनकी जड़ों को सींचें। थोड़ जल पुन: पेड़ की जड़ से उठा लें और इसे रोगी के मस्तक, कंठ, हृदय और नाभि पर लगाने से रोगी चमत्कारिक रूप से ठीक होने लगेगा।

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