Raksha Bandhan 2022: कौन है भद्रा? क्यों पूछ रहे हैं लोग- 11 या 12 कब है 'रक्षाबंधन'?
नई दिल्ली, 10 अगस्त। भाई-बहन के प्रेम के त्योहार 'रक्षा बंधन' की डेट को लेकर जरा कन्फ्यूजन हो गया है। कुछ लोग इसे 11 अगस्त को मनाने वाले हैं तो कुछ लोग इसे 12 अगस्त को सेलिब्रेट करेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिन 'भद्रा' लग रहा है और इस कारण ये असमंजस की उपस्थिति पैदा हो गई है। वैसे पंचाग के मुताबिक सावन मास की पूर्णिमा 11 अगस्त को ही है इसलिए कैलेंडर में राखी की छुट्टी 11 अगस्त ही अंकित की गई है।
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11 अगस्त को ही लगेगी पूर्णिमा
लेकिन इस दिन पूर्णिमा सुबह 10:39 AM से शुरू होगी , जो कि 12 अगस्त को 7:05 AM पर समाप्त होगी जबकि भद्राकाल सुबह 10.40 AM से रात 08:51 PM तक रहेगा, ऐसे में राखी बांधने का वक्त रात 08 बजकर 51 तक के बाद ही है और चूंकि कुछ जगहों पर सूर्यास्त के बाद शुभ काम नहीं होता है इसलिए कुछ स्थानों पर 'रक्षा बंधन' का पर्व 11 अगस्त को तो कुछ जगहों पर 'रक्षा बंधन' का त्योहार 12 अगस्त को मनाया जाएगा।

आखिर ये भद्रा काल है क्या?
अब प्रश्न ये उठता है कि आखिर ये भद्रा काल है क्या? जिसके कारण इतना कन्फ्यूजन पैदा हो गया है तो आपको बता दें कि 'भद्रा' भगवान सूर्य की बेटी और न्याय के देवता शनिदेव की बहन हैं। अपने भाई की ही तरह वो भी काफी कड़क हैं। उन्हें काल के एक अंश का वरदान मिला हुआ है, उनका रूप भी काफी विकराल है, वो जरा भी अपमान और नियम के विरूद्ध काम को बर्दाश्त नहीं करती हैं। जिसके कारण ही उनके काल समय में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है।

रावण को भद्रा में राखी बांधी गई थी
इसके पीछे एक कहानी भी प्रचलित है, ऐसा माना जाता है कि सूपनखा मे अपने भाई रावण को भद्रा में राखी बांधी थी, जिसके कारण रावण का विनाश हो गया था, इस कारण लोग भद्राकाल में राखी बांधने से मना करते हैं।
भगवान शिव का तांडव
तो वहीं कुछ पुराणों में जिक्र है कि भद्रा के वक्त भगवान शिव तांडव करते हैं, जो कि उनके गुस्से का प्रतीक है, इसलिए भी लोग भद्रा काल में कोई भी शुभ काम नहीं करते हैं।

कृष्ण और द्रौपदी की कहानी
तो वहीं महाभारत की कथा में कृष्ण और द्रौपदी की राखी की कहानी प्रचलित है। एक युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण की उंगली कट गई थी, जिस पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी के पल्लू फाड़कर उनकी चोट पर पट्टी बांधी थीं। तब कृ्ष्ण जी ने उन्हें हमेशा रक्षा करने का वचन दिया था और वो उन्होंने तब निभाया जब दुष्ट दुःशासन ने भरी सभा में द्रौपदी का चीर हरण करने की कोशिश की थी।

रानी कर्णावती ने हुमायूं को भेजी थी राखी
तो वहीं राखी की एक सुंदर कहानी का जिक्र राजस्थान से भी आता है। कहा जाता है कि मेवाड़ को सुल्तान बहादुर शाह से बचाने के लिए चितौड़गढ़ की रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजी थी। तब हुमायूं ने भी उन्हें बहन मानकर उनकी रक्षा की थी।
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