कार्तिक पूर्णिमा पर तटों पर लगा श्रद्धालुओं का तांता

कार्तिक पूर्णिमा पर राजधानी वासियों ने जहां गोमती में डुबकी लगायी वहीं प्रदेश के गंगा किनारे शहर इलाहाबाद, वाराणसी, चित्रकूट और गढ़मुक्तेश्वर में गंगा के घाटों पर श्रद्घालुओं की भीड़ रही। वाराणसी और इलाहाबाद में गंगा के तट पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। वाराणसी में हर तरफ हर-हर गंगे तो इलाहाबाद में भी त्रिवेणी के तट पर गंगा मां की जय-जयकार हो रही है।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से गंगा में स्नान करने से भक्तों के सभी पाप कट जाते हैं. साथ ही कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद गरीबों के बीच अन्न, वस्त्र, पैसा आदि दान करने से महापुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन ब्रह्मा के मंदिर में श्रद्धालु दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान करवाते हैं. इसके अलावा पूजा, अर्चना कर लोग पुरोहितों को दान पुण्य भी कर रहे हैं।
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा-गोमती के पवित्र तटों पर मेले का भी आयोजन किया जा रहा है। राजधानी में गोमती किनारे एक माह तक चलने वाला कार्तिक मेला भी शुरू हो गया है। इस मेले में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से कलाकार अपनी कलाकृतियों व सामानों को यहां बेचने आते हैं। गोमती में स्नान के साथ ही श्रद्घालु मेले में खरीददारी करने का भी लुत्फ उठा रहे हैं। कार्तिक पूर्णिमा के बारे में बताया जाता है कि इस दिन कृतिका नक्षत्र हो तो यह महाकार्तिकी होती है। काशी में इसे देव दिपावली के रूप में मनाते हैं। इसी दिन गंगा घाटों पर दीपों से सजाया जाता है और गंगा आरती होती है। इस दिन सांय काल दीपदान का भी विशेष महत्व है।












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