Pausha Putrada Ekadashi 2025 (Do-Donts): आज के दिन भूलकर भी ना करें ये काम, वरना होगा बड़ा नुकसान
Pausha Putrada Ekadashi 2025 (Do-Donts) Hindi: हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी काफी महत्वपूर्ण है, आज के दिन जो लोग निसंतान हैं उन्हें ये पूजा जरूर करनी चाहिए, ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस व्रत को करते हैं उनके घर के आंगन में जल्द ही किलकारियां गूंजती है।
इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।अक्सर लोग जानकारी के अभाव में कुछ गलतियां कर देते हैं, जिसकी वजह से लोगों को उस व्रत का फल उतना नहीं मिल पाता है, जितना की मिलना चाहिए।

इसलिए यहां हम आपको बताते हैं कि इस उपवास के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए?
पुत्रदा एकादशी पर क्या करें? (Pausha Putrada Ekadashi 2025)
- व्रत करने वाले किसी पवित्र नदी में स्नान करें अगर संभव ना हों तो गंगाजल की कुछ बूंदों को नहाने वाली बाल्टी में मिलाकर स्नान करें।
- नहाने के बाद व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें।
- विष्णु जी को फल, फूल, तुलसीदल, और पंचामृत अर्पित करें।
- भोजन, वस्त्र, और धन का दान करें।
- विष्णु पुराण या व्रत कथा सुनें।
- यदि संभव हो तो निर्जल व्रत करें।
पुत्रदा एकादशी पर क्या न करें (Pausha Putrada Ekadashi 2025)
- लहसुन, प्याज, मांस, और मदिरा का सेवन ना करें।
- इस दिन किसी से क्रोध न करें ।
- यह व्रत मानसिक शांति और पवित्रता के लिए होता है इसलिए तनाव से बचें।
- इस दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए।
पारण का समय (Pausha Putrada Ekadashi 2025)
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद किया जाता है।
एकादशी के दिन करें विष्णु चालीसा का पाठ (Pausha Putrada Ekadashi 2025)
दोहा
- विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
- कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ।।
विष्णु चालीसा ((Pausha Putrada Ekadashi 2025)
- नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
- प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ।।
- सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
- तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ।।
- शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
- सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ।।
- सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
- सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ।।
- पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
- करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ।।
- धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
- भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ।।
- आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
- धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया।।
- अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
- देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया।।
- कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
- शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ।।
- वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
- मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ।।
- असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
- हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई।।
- सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
- तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी।।
- देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
- हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी।।
- तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
- गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे।।
- हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
- देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे।।
- चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।
- जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ।।
- शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
- करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ।।
- करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
- सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ।।
- दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।
- पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ।।
- सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।
- निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै।।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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