Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Papankusha Ekadashi 2025: कौन थी एकादशी? क्या है कथा और आरती?

Papankusha Ekadashi 2025 Katha: आज पापांकुशा एकादशी है, इस व्रत को भगवान विष्णु की उपासना का श्रेष्ठ दिन माना जाता है। इस दिन उपवास करने से समस्त पाप नष्ट होते हैं और भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेता युग में एक महान राजा महामति हुआ करते थे, वे बड़े ही धर्मपरायण थे लेकिन उनके राज्य में लोग पाप कर्मों में लिप्त हो गए थे।

इस स्थिति को देखकर राजा ने तपस्या शुरू कर दी। तभी नारद मुनि वहां आए और उन्होंने राजा से कहा - 'हे राजन! यदि आप अपने राज्य से पापों का नाश करना चाहते हैं तो पापांकुशा एकादशी व्रत करें। यह व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला है।'

Papankusha Ekadashi 2025

नारद मुनि ने आगे बताया कि जब भगवान विष्णु ने मुर नामक असुर का वध किया, तब उनकी देह से एक दिव्य स्त्री प्रकट हुई। भगवान विष्णु ने उसे 'एकादशी' नाम दिया। भगवान ने कहा कि 'एकादशी व्रत करने वाले मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाएंगे और उसे वैकुंठधाम की प्राप्ति होगी।' तभी से एकादशी व्रत का आरंभ हुआ।

व्रत विधि (Papankusha Ekadashi 2025)

एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें। तुलसी पत्र अर्पित कर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें। दिनभर उपवास रखें और जल व फल का सेवन कर सकते हैं।
रात्रि को जागरण करें और विष्णु जी की भक्ति करें। द्वादशी तिथि को प्रातः स्नान कर दान-पुण्य करें और व्रत का पारण करें।

एकादशी व्रत का महत्व (Papankusha Ekadashi 2025)

पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मन की शांति और सुख-समृद्धि मिलती है। पूर्व जन्म के दोष और कर्मों का शुद्धिकरण होता है।
यह व्रत मोक्ष और वैकुंठ धाम की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

भगवान विष्णु की आरती

  • ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे
  • ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
  • भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
  • ॐ जय जगदीश हरे...
  • जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
  • स्वामी दुःख विनसे मन का।
  • सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
  • ॐ जय जगदीश हरे...
  • ॐ जय जगदीश हरे...
  • मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
  • स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
  • तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
  • तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
  • स्वामी तुम अन्तर्यामी।
  • पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
  • ॐ जय जगदीश हरे...
  • तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
  • स्वामी तुम पालन-कर्ता।
  • मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
  • ॐ जय जगदीश हरे...
  • तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
  • स्वामी सबके प्राणपति।
  • किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
  • ॐ जय जगदीश हरे...
  • दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
  • स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
  • अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥
  • ॐ जय जगदीश हरे...
  • विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।
  • स्वामी पाप हरो देवा।
  • श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा॥
  • ॐ जय जगदीश हरे...
  • श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
  • स्वामी जो कोई नर गावे।
  • कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
  • ॐ जय जगदीश हरे...

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+