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Nirjala Ekadashi 2023 DO-DONTS: भीमा एकादशी पर भूलकर ना करें ये काम, वरना होंगे पाप के भागीदार

Nirjala Ekadashi Per Kya Kare aur Kya na Kare: इस व्रत का उल्लेख महाभारत में भी है इसलिए इसे 'पांडव एकादशी' और 'भीमा एकादशी' के रूप में पाया जाता है।

Nirjala Ekadashi 2023 DO-DONTS:

Nirjala Ekadashi 2023 DO-DONTS: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'निर्जला एकादशी' कहा जाता है, जो कि साल की सबसे बड़ी और सबसे कठिन एकादशी है क्योंकि ये व्रत निर्जला रखा जाता है। अगर आप हर एकादशी का व्रत नहीं रख पाते हैं तो केवल आज के दिन का उपवास रख लें तो आपको समस्त फलों की प्राप्ति होगी और श्री हरि की कृपा से आपको मोक्ष की प्राप्ति होगी।

महाभारत में भी है इस व्रत का वर्णन

ये बेहद ही कठिन व्रत है, इसमें 24 घंटे बिना अन्न-जल के रहना पड़ता है। कहा जाता है कि कुंती पुत्र भीम को भूख बहुत लगती थी इसलिए वो हर माह पड़ने वाले एकादशी के व्रत को रख नहीं पाते थे इस वजह से वो काफी परेशान रहा करते थे।

भीम के कारण भीमा एकादशी पड़ा नाम

अपनी ये समस्या उन्होंने महर्षि वेद व्यास को बताई तो उन्होंने कहा कि 'हे महापराक्रमी भीम, आप ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को बिना पानी के व्रत करें, तो आपको सारी एकादशी के व्रत के फल एकसाथ मिल जाएंगे।' इसके बाद भीम ने ये व्रत किया, जिसके कारण उनके पराक्रम में तो वृद्धि हुई ही साथ ही उन्हें मोक्ष की भी प्राप्ति हुई थी, तब से इस एकादशी का नाम 'भीमा एकादशी' पड़ गया।

विष्णु भगवान दोनों हाथों से आशीष देते हैं

आपको बता दें कि आज के दिन भगवान विष्णु की जो सच्चे मन से पूजा करते हैं उन्हें विष्णु भगवान दोनों हाथों से आशीष देते हैं। उसे कभी दुख छू भी नहीं पाता है और उसे हर तरह के सुख की प्राप्ति होती है। श्रीहरि की कृपा हमेशा अपने भक्त पर बनी रहती है। आज के व्रत में कुछ चीजों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है क्योंकि ऐसा करने से इंसान को दोगुने फल की प्राप्ति होती है।

क्या करें और क्या ना करें

  • एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, माना जाता है कि तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास होता है, पत्ते तोड़कर आप भगवान विष्णु की प्रिया को तकलीफ पहुंचा सकते हैं इसलिए इस दिन तुलसी जी की खास पूजा करनी चाहिए, ऐसा करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों ही प्रसन्न होते हैं।
  • एकादशी का व्रत रखने वालों को व्रत के प्रारंभ से लेकर अंत होने तक बिना अन्न-जल के ही रहना चाहिए।
  • एकादशी की पूजा करने वालों को घर में मासांहारी भोजन भी नहीं बनना चाहिए।
  • हो सके तो प्याज -लहसुन वाले खाने से भी घर-परिवार के लोग दूर रहें।
  • एकादशी के दिन चावल और साबूदाना खाना दोनों अच्छा नहीं माना जाता है,इनका सेवन करने वाले पाप के भागीदार बन सकते हैं।
  • एकादशी के दिन सेम और मसूर की दाल भी नहीं खानी चाहिए, इनका सेवन भी व्रत के दिन शुभ नहीं होता।
  • एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को आज के दिन साफ जल से ही स्नान करना चाहिए, हो सके तो गंगा जल को मिलाकर स्नान करें।
  • एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को इस दिन गीता का पाठ करना चाहिए।
  • इस दिन पूजा करते वक्त 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना चाहिए।
  • इस दिन निंदा और झगड़ों से दूर रहें।
  • मन को सात्विक कामों में लगाएं।
  • ब्रहमचर्य का पालन करें।
  • भजन-कीर्तन में मन लगाएं।
  • बाल और नाखून नहीं कटवाएं।
  • मदिरापान से दूर रहें।
  • मन को भटकने से बचाएं।

एकादशी और पारण समय

एकादशी तिथि प्रारंभ 30 मई दोपहर 1:07 PM से हो गया था, जिसकी सामाप्ति आज दोपहर 1:45 PM हो जाएगी। व्रत के पारण का वक्त 1 जून प्रात: 5:42 AM से 8:23 AM के बीच है।

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