Maa Gauri: सुख-शांति और समृद्धि चाहिए तो जरूर करें महागौरी चालीसा का पाठ
Navratri 8 days, Maha Astami: नवरात्रि के 8वें दिन महागौरी की पूजा होती है। मां गौरी का ये रूप बेहद सरस, सुलभ और मोहक है। महागौरी की चार भुजाएं हैं। इनका वाहन वृषभ है।
इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बाएं हाथ में वर-मुद्रा हैं। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है। इनकी उपासना से भक्तों को सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

नवरात्रि के 8वें दिन की महत्ता
अष्टमी तिथि पर महागौरी का पूजन करने से भक्तों की समस्त बाधाएँ दूर होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि महागौरी ने कठिन तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया और उनके रूप में श्वेत वस्त्र धारण कर जगत की कल्याणकारी शक्तियों का संचार किया। इस दिन विशेष रूप से कन्या पूजन भी किया जाता है, जिसमें छोटी बालिकाओं को देवी के रूप में पूजते हैं।
महागौरी चालीसा (Mahagauri Chalisa)
॥ दोहा ॥
जय गिरिराज किशोरी, जय महेश मति धोरी।
जय उमा मातु भवानी, जय अम्बे जग रानी॥
॥ चौपाई ॥
- सुरवर मुनि जन सेवत महिमा,
- तुम्हारी वरदानी।
- गौर वर्ण की शुचि अति प्यारी,
- माँ मैं हूँ तुम्हारी॥
- जग जननी तुम परम सयानी,
- सकल शक्ति की खानी।
- दुख दरिद्र मिटाने वाली,
- भक्तों का सुख दानी॥
- सोमवारी अष्टमी को पूजा,
- तुम्हारी फलदाई।
- जो कोई नित ध्यान धरे,
- उसका भाग्य बनाओ॥
॥ महागौरी की आरती ॥ (Mahagauri Aarti)
- जय महागौरी जगत की माया।
- जया उमा देवी जय महेश साया॥
- कंचन रंग अति शोभित धानी।
- रत्न मणि भूषित जग वन्दनीयानी॥
- हिमकन वसना श्वेतांबर धारा।
- रक्त पुष्प अति सोहत प्यारा॥
- कहैं सभी तुझको माता।
- जगतारिणी दुःख नाशिनी दाता॥
- भक्तों की तुम हो व्रत पुकार।
- देवों में भी हो पूज्य अपार॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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