नवरात्रि : नौ दिन, नौ प्रयोग और नौ कामनाओं की पूर्ति
नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से प्रारंभ हो रही है। नवरात्रि का प्रत्येक दिन अपने आप में सिद्ध और दैवीय कृपा वाला होता है। इस नवरात्रि में अनेक शुभ योग भी बन रहे हैं, जिनमें चार सर्वार्थसिद्धि और चार रवियोग का संयोग बना है। इसलिए यह नवरात्रि विशेष है। यह नवरात्रि योग, भोग और मोक्ष प्रदायक है।
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यदि आपके जीवन में भी कोई परेशानी है तो नवरात्रि के नौ दिनों में नौ अलग-अलग कामनाओं की पूर्ति के लिए हम बता रहे हैं सिद्ध नौ प्रयोग। इन्हें अपनी परेशानी के अनुसार करें और फिर देखें चमत्कार। नवरात्रि समाप्त होने तक आपकी परेशानियां भी समाप्त होने लगेंगी। ये सारे प्रयोग दुर्गा सप्तशती, देवी भागवत और रूद्रयामल तंत्र में वर्णित हैं।
- धन प्राप्ति के लिए : धन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। नवरात्रि के प्रथम दिन अपने घर के पूजा स्थान में देवी की मूर्ति या चित्र के समक्ष बैठकर उनकी पूजा करें। देवी को सवा किलो गाय के घी का नैवेद्य लगाएं। नैवेद्य लगाने के बाद इसमें से थोड़ा सा प्रसाद स्वयं ग्रहण करें और फिर इस घी को सात कन्याओं में बराबर वितरित करें।
- आरोग्य के लिए : यदि आप या आपके परिवार में कोई सदस्य लगातार बीमार है। बीमारियों पर खर्च अधिक हो रहा है तो नवरात्रि के दूसरे दिन देवी को शक्कर या मिश्री का भोग लगाएं। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। 7 कन्याओं को मिष्ठान्न या फल वितरण करें।
- नौकरी के लिए : यदि आपको अनेक प्रकार के कष्ट हैं और मानसिक रूप से हमेशा तनाव में रहते हैं, अच्छा जॉब नहीं है तो नवरात्रि की तृतीया तिथि के दिन देवी को सवा लीटर गाय के दूध का नैवेद्य लगाएं और यह दूध गरीबों में बांट दें। इससे सारे दुख दूर होंगे। अच्छा जॉब मिलेगा।
- नेतृत्व क्षमता के लिए : यदि आप जॉब या बिजनेस में तरक्की करना चाहते हैं, बॉस बनना चाहते हैं। आप मैनेजमेंट के बेहतरीन खिलाड़ी बनना चाहते हैं तो चतुर्थी के दिन गाय को हरा चारा खिलाएं और मंदिरों के बाहर जो भी भिखारी कन्याएं नजर आएं उन्हें यथाशक्ति नए वस्त्र भेंट करें।
- शीघ्र विवाह और संतान प्राप्ति के लिए : जिन युवक युवतियों का विवाह नहीं हो पा रहा है या जिन्हें विवाह के अनेक वर्षो बाद भी संतान प्राप्त नहीं हो पा रही है, वे पंचमी के दिन देवी मंदिर में जाकर सुहाग की सामग्री भेंट करें। बुजुर्ग महिलाओं को पान खिलाएं।
- आकर्षण प्रभाव के लिए : नवरात्रि के छठे दिन देवी को शहद का भोग लगाकर, किसी ब्राह्मण को शहद भेंट करें। इसके साथ ही देवी को चंपा या चमेली का इत्र भेंट करें।
- दुर्घटना से रक्षा के लिए : आकस्मिक रूप से आने वाली दुर्घटनाओं, हानि, अपयश, अपमान आदि से बचने के लिए सप्तमी के दिन सात बार दुर्गा चालीसा का पाठ करें। देवी को मीठा पान और इत्र भेंट करें।
- नवग्रह शांति के लिए : नवग्रहों की शांति और जीवन में मानसिक सुख के लिए अष्टमी के दिन देवी को आठ श्रीफल भेंट करें। हलवे का नैवेद्य लगाएं और यह हलवा कन्याओं में वितरण कर दें।
- सर्वसुख के लिए : समस्त प्रकार के सुखों के लिए नवमी के दिन देवी के नवार्ण मंत्र एें ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै का नौ माला पाठ करें। देवी हवन करें। गरीबों को भोजन करवाएं।












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