Mahagauri ki Aarti: पढ़ें 'मां गौरी' की आरती
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। मां का 8वां रूप मां 'गौरी ' का है। गौरी मां का रूप बेहद ही सरस, मोहक और सुंदर है। गौरी मां का पार्वती का ही रूप मानते हैं। मां गौरी की पूजा करने से इंसान के सारे दुख-कष्ट और दर्द दूर हो जाते हैं। मां गौरी काफी दयालु भी हैं और अपने भक्तों से बहुत ज्यादा प्रेम करने वाली हैं। मां गौरी शक्ति, प्रेम और ज्ञान का पर्याय है। जो भी व्यक्ति इनकी शरण में जाता है उसे दुनिया का हर सुख नसीब होता है।

पढ़ें 'मां गौरी' की आरती
जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
मांग सिंदूर विराजत,
टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना,
चंद्रवदन नीको ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कनक समान कलेवर,
रक्ताम्बर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला,
कंठन पर साजै ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
केहरि वाहन राजत,
खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत,
तिनके दुखहारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कानन कुण्डल शोभित,
नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर,
सम राजत ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे,
महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना,
निशदिन मदमाती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चण्ड-मुण्ड संहारे,
शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे,
सुर भयहीन करे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
ब्रह्माणी, रूद्राणी,
तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी,
तुम शिव पटरानी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत,
नृत्य करत भैरों ।
बाजत ताल मृदंगा,
अरू बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
तुम ही जग की माता,
तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता ।
सुख संपति करता ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
भुजा चार अति शोभित,
खडग खप्पर धारी ।
मनवांछित फल पावत,
सेवत नर नारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कंचन थाल विराजत,
अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत,
कोटि रतन ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
श्री अंबेजी की आरति,
जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी,
सुख-संपति पावे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी ।
ये हैं मां के नौ रूप
- प्रथम दिन: शैलपुत्री
- दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी
- तीसरा दिन: चंद्रघंटा
- चौथा दिन: कुष्मांडा
- 5वां दिन: स्कंदमाता
- 6ठवां दिन: कात्यायनी
- 7वां दिन: कालरात्रि
- 8वां दिन: महागौरी
- 9वां दिन: मां सिद्धिदात्री












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