Kalaratri Mata ki Aarti: पढ़ें 'कालरात्रि' माता की आरती
नई दिल्ली, 09 अक्टूबर। मां का 7वां रूप 'कालरात्रि' का है। इन्हें ही मां काली भी कहते हैं। हालांकि मां काली का रूप थोड़ा सा भयानक है लेकिन ये हमेशा ही शुभ फल देती हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उनसे बहुत ज्यादा प्रेम करती हैं। मां हमेशा दुष्टों का विनाश करती हैं, उन्होंने दानवों को मारने के लिए ये रूप धारण किया था। मां काली की पूजा करने से इंसानो को सिद्दियों की प्राप्ति होती है। दुख-पीड़ा, भय ये सब उसे छू भी नहीं पाते हैं। मां काली का कृपा से इंसान को सफलता और समृद्दि प्राप्त होती है।

पढ़ें 'कालरात्रि' माता की आरती
कालरात्रि जय-जय-महाकाली।
काल के मुह से बचाने वाली।
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतार।
पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा।
खड्ग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली।
कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा।
सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी।
रक्तदंता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना।
ना कोई चिंता रहे बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी।
उस पर कभी कष्ट ना आवें।
महाकाली मां जिसे बचावे।
तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि मां तेरी जय।
ये हैं मां के नौ रूप
- प्रथम दिन: शैलपुत्री
- दूसरी दिन: ब्रह्मचारिणी
- तीसरा दिन: चंद्रघंटा
- चौथा दिन: कुष्मांडा
- 5वां दिन: स्कंदमाता
- 6ठवां दिन: कात्यायनी
- 7वां दिन: कालरात्रि
- 8वां दिन: महागौरी
- 9वां दिन: मां सिद्धिदात्री












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