Muharram 2021: नहीं दिखा 'मुहर्रम' का चांद, जानिए कब है इस्लामी साल का पहला दिन?
नई दिल्ली, 10 अगस्त। अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक इस्लामी साल का महीना आज से शुरू हो रहा है। सोमवार को 'मुहर्रम' का चांद नहीं दिखा था, जिसके बाद लोगों में इस बात को लेकर असमंजस था कि 'मुहर्रम' आज है या कल लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से आज शाम से ही 1443 हिजरी साल की शुरुआत हो जाएगी लेकिन 'मुहर्रम' का पहला दिन कल ही माना जाएगा क्योंकि समय के हिसाब से 24 घंटे कल ही पूरे होंगे।

मुस्लिमों के शिया समुदाय के लिए ये मातम का दिन
दरअसल 'मुहर्रम' कोई त्योहार नहीं है बल्कि मुस्लिमों के शिया समुदाय के लिए ये मातम का महीना है, जिसे कि वो इमाम हुसैन के शोक में मनाते हैं। आमतौर पर 10वें 'मुहर्रम' को ही सबसे पावन माना जाता हैं क्योंकि इस्लाम की रक्षा के लिए हजरत इमाम हुसैन ने अपने प्राण त्याग दिए थे, इसी वजह से 10वें 'मुहर्रम' को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है, जिसे कि 'आशूरा' का जाता है।
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खास बातें
- 'मुहर्रम' की पहली तारीख से मुसलमानों का नया साल हिजरी शुरू होता है।
- मुस्लिम देश के लोग 'हिजरी कैलेंडर' को ही मानते हैं।
- चार पवित्र महीनों में से एक माना जाता है 'मुहर्रम' को।
- 'मुहर्रम' का अर्थ होता है 'हराम' यानी 'निषिद्ध'।
- इस महीने में ताजिया और जुलूस निकाले जाने की परंपरा है।
- इस पूरे महीने को अल्लाह का महीना कहा जाता है।

क्या है इतिहास, क्यों मनाते हैं मातम?
माना जाता है कि इसी महीने में कर्बला नामक स्थान में एक धर्म युद्ध हुआ था, जो पैंगबर हजरत मुहम्म्द साहब के नाती और यजीद के बीच हुआ। इस धर्म युद्ध में जीत हजरत साहब की हुई थी लेकिन यजीद के कमांडर ने धोखे से हजरत इमाम हुसैन और उनके सभी 72 साथियो को शहीद कर दिया था। जिसमें उनके छः महीने का पुत्र हजरत अली असगर भी शामिल थे। तभी से ये महीना गम, मातम और शहादत का माह कहलाता है।












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