Mokshada Ekadashi 2020: मोक्षदा एकादशी आज, जानिए पूजा-विधि और महत्व
Mokshada Ekadashi Today: वर्ष की समस्त एकादशियों में मोक्षदा एकादशी का महत्व सर्वविदित है। मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली मोक्षदा एकादशी आज मनाई जा रही है। यह एकादशी समस्त प्रकार के भोग दिलाने में उत्तम मानी गई है। साथ ही यह मनुष्य को मोक्ष प्रदान करती है। इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है, क्योंकि इसी एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था।

बड़े से बड़े पापों का भी नाश हो जाता है...
पद्मपुराण में युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण उन्हें मोक्षदा एकादशी व्रत के संदर्भ में बताते हैं इस एक एकादशी का व्रत पूर्ण भक्ति भाव से करने वाला मनुष्य जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त हो जाता है। इस दिन तुलसी की मंजरी से भगवान दामोदर का पूजन करने से अनजाने में हुए बड़े से बड़े पापों का भी नाश हो जाता है। इस दिन व्रत रखकर रात्रि जागरण करते हुए श्रीहरि के नाम का संकीर्तन करें। पूर्वकाल में वैखानस नामक राजा ने पर्वत मुनि के आदेशानुसार अपने पितरों की मुक्ति के लिए मोक्षदा एकादशी का व्रत किया था। व्रत के प्रभाव से राजा के पितरों का नरक से उद्धार हो गया था।

कैसे करें व्रत पूजन
- मोक्षदा एकादशी के दिन प्रात:काल सूर्योदय पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेकर भगवान श्री दामोदर का पूजन करें।
- पूजा में घी के दीए का प्रयोग करें और दीये में थोड़ा सा खड़ा धनिया डाल लें।
- तुलसी की मंजरी दामोदर को अर्पित करें, मिष्ठान्न और फलों का नैवेद्य लगाएं।
- मोक्षदा एकादशी व्रत की कथा सुनें।
- रात्रि में जागरण करते हुए भगवान का संकीर्तन करें।
- इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता के 11वें अध्याय का पाठ अवश्य करना चाहिए।
- चंदन की माला से श्रीकृष्ण दामोदराय नम: मंत्र का जाप करें।

एकादशी कब से कब तक
- एकादशी तिथि प्रारंभ 24 दिसंबर रात्रि 11.17 बजे से
- एकादशी तिथि पूर्ण 25-26 दिसंबर मध्य रात्रि 1.54 बजे तक
- पारण समय 26 दिसंबर प्रात: 8.30 से 9.17 बजे तक
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