गजलों को प्रोत्साहन नहीं देता मीडिया

Asif Mehandi
नई दिल्ली। प्रख्यात पाकिस्तानी गजल गायक मेहदी हसन के बेटे आसिफ मेहदी का मानना है कि युवा श्रोताओं के गजलों से दूर होने का कारण मीडिया है। उनका कहना है कि "मीडिया पॉप संगीत को तो जोर-शोर से प्रोत्साहित करता है लेकिन गज़लों को अधिक कवरेज नहीं देता।

अपने परिवार के भारत से गहरे ताल्लुक के प्रति सचेत मेहदी अब बॉलीवुड के लिए गाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "यदि भारत और पाकिस्तान दोनों जगहों पर मीडिया अच्छे दृश्यों और प्रस्तुति के साथ गजलों को पॉप संगीत की ही तरह प्रोत्साहित करे तो युवा गजलों की ओर लौट सकते हैं।"

इन दिनों मेहदी भारत आए हुए हैं। वह जगजीत सिंह सहित कई अन्य गजल गायकों के साथ दिल्ली, लखनऊ, अमृतसर और हैदराबाद में 10-15 दिसम्बर के बीच अपनी प्रस्तुति देंगे। उन्होंने गुरुवार को फिक्की (एफआईसीसीआई) सभागार में जगजीत सिंह के साथ प्रस्तुति दी। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और गजलों को प्रोत्साहित करने वाले मंच 'रूट्स 2 रूट्स' ने संयुक्त रूप से इन गजल कार्यक्रमों का आयोजन किया है।

कोशिश

मेहदी ने कहा, "मैं अपनी ओर से गजलों को उनके शुद्ध रूप में प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रहा हूं। मैं गजल समारोहों में युवा श्रोताओं की संख्या बढ़ाने के लिए पाकिस्तान और भारत में विभिन्न मंचों पर बात कर रहा हूं। 'रूट्स 2 रूट्स' के साथ मेरा सहयोग महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने मेरे वालिद (पिता मेहदी हसन) और उनके प्रसिद्ध साथियों गुलाम अली, फरीदा खानम और इकबाल बानो जैसे गजल गायकों के अमर संगीत को प्रोत्साहित करने में मेरी मदद की है।"

अपने पिता जैसी ही आवाज के मालिक मेहदी अब बॉलीवुड में अपनी शुरुआत करने को तैयार हैं। मेहदी कहते हैं कि उनके पास बॉलीवुड की कई फिल्मों में गाने के प्रस्ताव हैं। वह कहते हैं कि वह लंबे समय से हिंदी फिल्मों में गाना चाहते थे। उन्हें उम्मीद है कि वह जल्दी ही यह शुरुआत कर सकेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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