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Makar Sankranti 2025: मकर संक्रान्ति पर क्यों करते हैं काले तिल का दान? शनिदेव से जुड़ा है राज

Makar Sankranti 2025: आज मकर संक्रान्ति का पर्व है, साल का पहला त्योहार होने की वजह से इस त्योहार का इंतजार लोगों को बेसब्री से होता है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं। माना जाता है कि दान-पुण्य करने से इंसान को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

गौरतलब है कि सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब ही मकर सक्रांति बनाई जाती है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने बेटे शनि के घर में आते हैं।

Makar Sankranti 2025

वैसे तो दोनों परम शत्रु हैं लेकिन इस दिन जब पुत्र के घर पिता पधारते हैं तो इनके बीत के मतभेद दूर हो जाते हैं। इसी वजह से मकर संक्रान्ति का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है।

काले तिल का दान क्यों किया जाता है? (Makar Sankranti 2025)

इस दिन काले तिल को दान देने की प्रथा है, इसके पीछे कारण ये है कि ऐसा करने से सूर्य और शनिदेव दोनों ही प्रसन्न होते हैं और इंसान के सारे कष्टों का अंत होता है। मकर संक्रान्ति के दिन सूर्यदेव को अर्ध्य देने के बाद शनि चालीसा का भी पाठ जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से इंसान ता उम्र निरोगी और स्वस्थ रहता है।

सूर्य को अर्ध्य देते वक्त निम्नलिखित मंत्रों का जाप करें( Makar Sankranti 2025)

  • ॐ सूर्याय नमः
  • ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
  • ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् (गायत्री मंत्र)
  • ॐ भास्कराय नमः

करें शनि चालीसा का पाठ (Makar Sankranti 2025)

दोहा

  • जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
  • दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
  • जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
  • करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

शनि चालीसा चौपाई (Makar Sankranti 2025)

  • जयति जयति शनिदेव दयाला।
  • करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
  • चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।
  • माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥
  • परम विशाल मनोहर भाला।
  • टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
  • कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।
  • हिय माल मुक्तन मणि दमके॥
  • कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
  • पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
  • पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन।
  • यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥
  • सौरी, मन्द, शनी, दश नामा।
  • भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
  • जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।
  • रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥
  • पर्वतहू तृण होई निहारत।
  • तृणहू को पर्वत करि डारत॥
  • राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।
  • कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
  • बनहूँ में मृग कपट दिखाई।
  • मातु जानकी गई चुराई॥
  • लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।
  • मचिगा दल में हाहाकारा॥
  • रावण की गति-मति बौराई।
  • रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
  • दियो कीट करि कंचन लंका।
  • बजि बजरंग बीर की डंका॥
  • नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।
  • चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
  • हार नौलखा लाग्यो चोरी।
  • हाथ पैर डरवायो तोरी॥
  • भारी दशा निकृष्ट दिखायो।
  • तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
  • विनय राग दीपक महं कीन्हयों।
  • तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥
  • हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।
  • आपहुं भरे डोम घर पानी॥
  • तैसे नल पर दशा सिरानी।
  • भूंजी-मीन कूद गई पानी॥
  • श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।
  • पारवती को सती कराई॥
  • तनिक विलोकत ही करि रीसा।
  • नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
  • पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।
  • बची द्रौपदी होति उघारी॥
  • कौरव के भी गति मति मारयो।
  • युद्ध महाभारत करि डारयो॥
  • रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला।
  • लेकर कूदि परयो पाताला॥
  • शेष देव-लखि विनती लाई।
  • रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
  • वाहन प्रभु के सात सुजाना।
  • जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
  • जम्बुक सिंह आदि नख धारी।
  • सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥
  • गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
  • हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥
  • गर्दभ हानि करै बहु काजा।
  • सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
  • जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।
  • मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
  • जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।
  • चोरी आदि होय डर भारी॥
  • तैसहि चारि चरण यह नामा।
  • स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
  • लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।
  • धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥
  • समता ताम्र रजत शुभकारी।
  • स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥
  • जो यह शनि चरित्र नित गावै।
  • कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥
  • अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
  • करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
  • जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।
  • विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥
  • पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।
  • दीप दान दै बहु सुख पावत॥
  • कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
  • शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥

शनि चालीसा दोहा (Makar Sankranti 2025)

  • पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।
  • करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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