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Maha Kumbh 2025: नेपाल, उत्तराखंड से मंगाई जा रही हैं रुद्राक्ष, तुलसी की मालाएं, जानिए खास बातें

Maha Kumbh 2025: प्रयागराज शहर 2025 में होने वाले भव्य महाकुंभ मेले के लिए तैयार हो रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि 13 जनवरी से 26 फरवरी तक आने वाले अनुमानित 40 से 45 करोड़ श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक और रसद संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागमों में से एक यह धार्मिक समागम भक्ति, परंपरा और सांप्रदायिक सद्भाव का मिश्रण होने है।

Maha Kumbh 2025

तीर्थयात्रियों की आमद की तैयारी में, प्रयागराज में दुकानदार, खास तौर पर संगम और मेला क्षेत्रों में, ज़रूरी धार्मिक वस्तुओं की एक पूरी श्रृंखला का स्टॉक करने में व्यस्त हैं। इनमें पूजा सामग्री और पात्र-पंचांग से लेकर रुद्राक्ष और तुलसी की मालाएँ, पवित्र ग्रंथ शामिल हैं।

नेपाल, उत्तराखंड से मंगाई जा रही हैं रुद्राक्ष, तुलसी की मालाएं

मेले के दौरान अनुष्ठानों और प्रथाओं के लिए ज़रूरी ये सामान नेपाल, वाराणसी, मथुरा और वृंदावन सहित देश भर के विभिन्न आध्यात्मिक केंद्रों से मंगवाए जाते हैं। इन सामानों की विविध उत्पत्ति त्योहार की अखिल भारतीय प्रकृति को उजागर करती है, जो पूरे उपमहाद्वीप से सामग्री और परंपराओं को एक साथ लाती है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था और आध्यात्मिक समृद्धि

महाकुंभ न केवल एक आध्यात्मिक आयोजन है, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक प्रोत्साहन भी है। प्रयागराज में दुकानदार, व्यापारी और व्यवसाय के मालिक इस मेले का बड़े उत्साह से इंतजार कर रहे हैं, इसे आर्थिक विकास के लिए एक बेहतरीन अवसर के रूप में देख रहे हैं।

लाखों श्रद्धालुओं के आने से विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय व्यवसायों को लाभ होगा और रोजगार के कई अवसर पैदा होंगे। होटल और रेस्तराँ से लेकर खाने-पीने के स्टॉल और धार्मिक सामान बेचने वाली दुकानों तक, हर क्षेत्र आगंतुकों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कमर कस रहा है।

थोक व्यापारी भी इस अवसर के लिए तैयारी कर रहे हैं, भारी मांग की उम्मीद में सामान जमा कर रहे हैं। उत्तराखंड और नेपाल से मंगाई गई रुद्राक्ष की माला, मथुरा-वृंदावन से तुलसी की माला और वाराणसी तथा दिल्ली के पहाड़गंज से रोली और चंदन जैसी पूजा सामग्री बड़ी मात्रा में जमा की जा रही है।

आवश्यक वस्तुएँ और आध्यात्मिक तैयारियाँ

महाकुंभ की तैयारी सिर्फ़ आर्थिक पहलुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक क्षेत्र में भी इसका विस्तार हो रहा है। पुजारी और श्रद्धालु अनुष्ठान करने के लिए वाराणसी में छपे पत्र और पंचांग जैसी विशिष्ट धार्मिक वस्तुओं की तलाश में हैं। धार्मिक पुस्तकों की मांग भी बढ़ रही है, जिसमें रामचरित मानस, भगवत गीता, शिव पुराण और भजन तथा आरती के संग्रह की मांग सबसे ज़्यादा है, खास तौर पर गीता प्रेस, गोरखपुर की पुस्तकों की।

इसके अलावा, मेले में आने वाले लोगों की धार्मिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए मुरादाबाद और वाराणसी से पीतल और तांबे की घंटियाँ, दीये और मूर्तियाँ जैसे सामान काफ़ी मात्रा में ऑर्डर किए जा रहे हैं। एक महीने तक चलने वाले आध्यात्मिक विश्राम-स्थल कल्पवास में भाग लेने वाले भक्त हवन सामग्री, आसन, गंगाजल, थाली, कलश और अन्य पूजा सामग्री की माँग कर रहे हैं।

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