Magh Mela 2023: क्या है माघ स्नान की तिथियां, क्यों होता है कल्पवास, क्या है नियम और महत्व?
माघ महीने में गंगा स्नान करने से इंसान के सारे कष्टों का अंत हो जाता है, वो पापमुक्त हो जाता है। इस पूरे महीने की खास तिथियों पर स्नान का महत्व होता है।

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Magh Mela 2023: पौष पूर्णिमा के साथ ही पौष माह का समापन हो जाता है और माघ मेले का प्रारंभ होता है। इस बार माघ माह 7 जनवरी से प्रारंभ हो रहा है और ये 18 फरवरी को महाशिवरात्रि को समाप्त होगा। इस महीने में लोग संगम किनारे कड़कड़ाती ठंड में पूजा-अर्चना करते हैं। इसलिए माघ मास में प्रयागराज में माघ मेले का आयोजन होता है। कहा जाता है इस महीने में सीधे भगवान से भक्त का साक्षात्कार होता है, लोग पूरे 45 दिनों तक ईश्वर की भक्ति में डूबे रहते हैं इसलिए माघमेले को अर्ध कुंभ मेला भी कहा जाता है।

कहते हैं कि इस महीने में गंगा स्नान करने से इंसान के सारे कष्टों का अंत हो जाता है, वो पापमुक्त हो जाता है। इस पूरे महीने की खास तिथियों पर स्नान का महत्व होता है। प्रयाग को तीर्थों का राजा माना जाता है इसलिए यहां माघ स्नान के लिए आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।
ये हैं इस बार की प्रमुख तिथियां
- 15 जनवरी, 2023 - मकर संक्रांति
- 21 जनवरी 2023 - मौनी अमावस्या
- 05 फरवरी 2023 - माघी पूर्णिमा
- 18 फरवरी 2023 - महाशिवरात्रि

इस पूरे महीने भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान सूर्य की पूजा की जाती है, जो कि यश, तप और ज्ञान के प्रतीक हैं। 45 दिनों का कल्पवास बहुत ही कठिन होता है जिसके कुछ खास नियम हैं।
- संगम किनारे स्वयं कुटिया बनाएं।
- अपने सारे काम स्वयं करें।
- स्वयं भोजन बनाएं और जमीन पर सोएं।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें और मांस-मदिरा से दूर रहें।
- एक समय भोजन करें, वो भी पूरी तरह से शाकाहारी और शुद्ध।
- तीन प्रहर का स्नान और पूजा जरूरी होती है।
- कल्पवास की शुरुआत मां तुलसी और भगवान शालिग्राम के पूजन से होता है।
- कल्पवास के पहले दिन मिट्टी में भक्तगण जौ बोते हैं और 45 दिन बाद उसे गंगा में प्रवाहित करके अपना कल्पवास समाप्त करते हैं।
- कल्पवास का मुख्य उद्देश्य खुद की आत्मा को शुद्ध करना और दूसरों की मदद करना इसलिए इस दौरन हर किसी को दान-पुण्य करना जरूरी है।












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