Annapurna Aarti: पढ़ें मां अन्नपूर्णा की आरती और महत्व
मां अन्नपूर्णा के प्रभाव से इंसान धनी बनता है, वो तरक्की करता है। वो हर तरह के सुख का भागीदार बनता है, उसे कष्ट नहीं होता।

Annapurna Aarti: मां अन्नपूर्णा भगवान शिव की पत्नी पार्वती का ही रूप हैं और काशी उनका ससुराल कहा जाता है। मां का रूप मोहक और सुंदर है। मां की कृपा मात्र से ही इंसान के सारे कष्टों का अंत हो जाता है। जहां भी मां का आशीष होता है, वहां कभी भी अन्न की कमी नहीं होती है। मां अन्नपूर्णा की आरती करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। मां अन्नपूर्णा के प्रभाव से इंसान धनी बनता है, वो तरक्की करता है। वो हर तरह के सुख का भागीदार बनता है, उसे कष्ट नहीं होता। मां की कृपा उसके पूरे कुल पर होती है। उसके चेहरे पर खुशी और संतोष नजर आता है।
मां अन्नपूर्णा की आरती
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके,
- कहां उसे विश्राम ।
- अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो,
- लेत होत सब काम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर,
- कालान्तर तक नाम ।
- सुर सुरों की रचना करती,
- कहाँ कृष्ण कहाँ राम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- चूमहि चरण चतुर चतुरानन,
- चारु चक्रधर श्याम ।
- चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर,
- शोभा लखहि ललाम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- देवि देव! दयनीय दशा में,
- दया-दया तब नाम ।
- त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल,
- शरण रूप तब धाम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या,
- श्री क्लीं कमला काम ।
- कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी,
- वर दे तू निष्काम ॥
- बारम्बार प्रणाम,
- मैया बारम्बार प्रणाम ।
- ॥ माता अन्नपूर्णा की जय ॥












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