Prashant Kishor का बदलापुर! PK ने स्टालिन से कैसे लिया बदला? साल भर पहले क्यों कहा था-DMK हारेगी

Prashant Kishor: तमिलनाडु में एमके स्टालिन की सरकार गिरने के बाद से लगातार चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर लोगों के बीच में चर्चा का विषय बने हुए हैं, TVK की बंपर जीत के बाद से पीके का एक इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हो हो रहा है , जो कि साल 2025 में उन्होंने टाइम्स नाउ को दिया था, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि 'इस बार के चुनाव में स्टालिन का हिसाब बराबर होगा और अब बारी रेवंत रेड्डी की है।'

दरअसल पीके स्टालिन की ओर से बिहारियों का अपमान किए जाने से नाराज थे। उन्होंने बेहद ही तल्ख अंदाज में कहा था कि 'जो बिहारियों का अपमान करेगा उसका भला कभी नहीं होगा, स्टालिन के साथ हो गया और अब बार रेवंत रेड्डी की है, वो हैं क्या, मैं किसी से नहीं डरता हूं।'

Prashant Kishor

उन्होंने साफ अंदाज में कहा था कि 'तमिलनाडु में डीएमके को हराने के लिए काम करूंगा। मैं ऐसे किसी व्यक्ति को सलाह नहीं दूंगा जो बिहारियों का अपमान करता है। उनका (डीएमके) हिसाब भी बराबर करेंगे।'

पीके ने 2025 में ही संकेत दे दिए थे कि DMK सरकार के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी तेजी से बढ़ रही है। उनका मानना था कि सरकार जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी नहीं उतर रही-खासतौर पर रोजगार, महंगाई और लोकल गवर्नेंस जैसे मुद्दों पर।

पीके ने दी थी 'हिसाब बराबर' करने की चेतावनी

खास बात ये है कि साल 2021 में पीके एमके स्टालिन के ही साथ थे लेकिन साल 2026 में उन्होंने TVK (विजय) का साथ दिया जिन्होंने तमिलनाडु में बंपर जीत हासिल की है। प्रशांत किशोर ने पहले भी स्टालिन सहित अन्य क्षेत्रीय नेताओं को 'हिसाब बराबर' करने की चेतावनी दी थी। वे यह भी दावा किया था कि उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में बिहारियों के खिलाफ हिंसा उनके कहने पर ही रुकवाई थी।

'विजय जीत सकते हैं 118 सीटों पर चुनाव'

मालूम हो कि चुनाव से पहले पीके ने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए भविष्यवाणी की थी कि 'विजय अगर अकेले चुनाव लड़ते हैं तो वो 118 सीटों पर चुनाव जीत सकते हैं। आप इसे नोट कर लीजिए।'

बदलापुर' की कहानी क्या है?

राजनीतिक गलियारों में इसे PK का 'बदलापुर' भी कहा जा रहा है। दरअसल, DMK से अलग होने के बाद वो लगातार यह साबित करना चाहते थे कि उनकी रणनीति के बिना चुनाव जीतना आसान नहीं है। हालांकि PK सीधे तौर पर किसी एक पार्टी के साथ इस चुनाव में जुड़े नहीं दिखे, लेकिन उनकी पुरानी रणनीतियों-जैसे नैरेटिव सेट करना, वोटर माइक्रो-मैनेजमेंट और विपक्ष को एकजुट करना-का असर साफ नजर आया।

विजय की सुनामी में हुआ स्टालिन का सूरज अस्त

मालूम हो कि TVK ने तमिलनाडु में 108 सीटें जीती हैं, जो कि बहुमत से महज 10 कम हैं। तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की ज़रूरत है लेकिन विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को इतनी सीटें नहीं मिली हैं हालांकि, तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ऐसे में सबकी नजर अब TVK पर है कि वो किसके साथ जाना पसंद करते हैं, हालांकि उन्हें कांग्रेस की ओर से खुला समर्थन का ऑफर दिया गया है।

क्या कहा था एमके स्टालिन ने?

आपको बता दें कि एमके स्टालिन और DMK के कई नेताओं ने बिहार के लोगों के लिए पिछली कई रैलियों में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिसमें उन्हें 'कम अक्ल' बताना और हिंदी भाषी मजदूरों को तमिलनाडु में टॉयलेट साफ करने वाला कहना भी शामिल है। इसी तरह के बयानों के कारण प्रशांत किशोर स्टालिन और उनकी पार्टी से नाराज थे और उन्होंने उनके खिलाफ मोर्चा खोला हुआ था।

कौन हैं प्रशांत किशोर?

राजनीतिक रणनीतिकार के तौर पर मशहूर प्रशांत किशोर आम लोगों में पीके के नाम से मशहूर हैं। 20 मार्च 1977 को बिहार के रोहतास जिले में जन्मे प्रशांत किशोर जन सुराज पार्टी के संस्थापक भी हैं। किशोर ने BJP, JD(U), INC, AAP, YSRCP, DMK और TMC सहित कई राजनीतिक दलों के लिए एक सफल राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में काम किया है। उनका पहला बड़ा राजनीतिक अभियान 2011 में था, जिसका उद्देश्य गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को 2012 के गुजरात विधानसभा चुनावों में तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर फिर से चुने जाने में मदद करना था। उन्होंने कई दलों के साथ काम किया और उन्हें आगे बढ़ाने में मदद की लेकिन जब वो खुद चुनावी रण में उतरे तो बिहार की जनता ने उन्हें बुरी तरह से ठुकरा दिया। जन सुराज पार्टी ने 2025 बिहार विधानसभा में कोई भी सीट नहीं जीत पाई थी।

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