Lord Shaligra Aarti: पढ़ें भगवान शालिग्राम की आरती और महत्व
भगवान शालिग्राम की पूजा करने से इंसान को कभी किसी भी बात का कष्ट नहीं होता है। पति-पत्नी के बीच प्रेम-भाव बना रहता है।

Lord Shaligram Aarti: भगवान शालिग्राम को साक्षात भगवान विष्णु का ही रूप माना जाता है, जिनकी शादी तुलसी माता से हुई है। इसलिए इनको तुलसी बहुत प्रिय हैं। वैसे शालिग्राम गंडकी नदी में पाए जाने वाला एक गोल कालेआकृतियों वाले पत्थर होता है जिसे वैष्णव लोग विष्णु मानकर पूजते हैं। भगवान शालिग्राम की पूजा करने से इंसान को कभी किसी भी बात का कष्ट नहीं होता है। पति-पत्नी के बीच प्रेम-भाव बना रहता है। इनकी पूजा करने से जिन लोगों का वैवाहिक जीवन अच्छा नहीं चल रहा होता है। वो भी अच्छा हो जाता है।
श्री शालिग्राम जी की आरती
- शालिग्राम सुनो विनती मेरी ।
- यह बरदान दयाकर पाऊं ।।
- प्रात: समय उठी मंजन करके ।
- प्रेम सहित सनान कराऊँ ।।
- चन्दन धुप दीप तुलसीदल ।
- वरन -बरन के पुष्प चढ़ाऊँ ।।
- तुम्हरे सामने नृत्य करूँ नित ।
- प्रभु घंटा शंख मृदंग बजाऊं ।।
- चरण धोय चरणामृत लेकर ।
- कुटुंब सहित बैकुण्ठ सिधारूं ।।
- जो कुछ रुखा सूखा घर में ।
- भोग लगाकर भोजन पाऊं ।।
- मन वचन कर्म से पाप किये ।
- जो परिक्रमा के साथ बहाऊँ ।।
- ऐसी कृपा करो मुझ पर ।
- जम के द्वार जाने न पाऊं ।।
- माधोदास की बिनती एहि है ।
- हरी दासन का दास कहाऊं ।।












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