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Lakshmi Panchami Vrat 2024: लक्ष्मी पंचमी व्रत आज, जानिए पूजा विधि और महत्व

Lakshmi Panchami 2024 Vrat Muhurat: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन लक्ष्मी पंचमी व्रत-पूजन किया जाता है। इसे श्री पंचमी भी कहा जाता है। यह दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने का दिन है।

Lakshmi Panchami Vrat 2024

इस बार लक्ष्मी पंचमी व्रत 12 अप्रैल 2024 शुक्रवार को आया है। शुक्रवार माता लक्ष्मी का ही दिन है इसलिए इस दिन लक्ष्मी पंचमी व्रत के आने से दोगुना लाभ प्राप्त होगा। लक्ष्मी पंचमी व्रत करने से व्रती के परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।

आर्थिक संकट दूर होता है और धन से जुड़े काम तेजी से होने लगते हैं। लक्ष्मी पंचमी व्रत के दिन विधि विधान से सायंकाल में माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। पंचमी तिथि 12 अप्रैल को दोपहर 1 बजकर 11 मिनट से प्रारंभ होकर अगले दिन 13 अप्रैल को दोप 12 बजकर 03 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इसलिए लक्ष्मी पंचमी व्रत पूजन 12 अप्रैल को ही किया जाएगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र और सौभाग्य योग भी है।

पूजा विधि

  • लक्ष्मी पंचमी के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर अपनी पूजा स्थान में बैठकर माता लक्ष्मी के चित्र या मूर्ति के समझ लक्ष्मी पंचमी व्रत का संकल्प लें। यह संकल्प सकाम और निष्काम दोनों प्रकार से लिया जा सकता है। सकाम अर्थात अपनी किसी विशेष आर्थिक परेशानी को दूर करने के लिए। संकल्प के दौरान उस कार्य की सिद्धि को भी बोला जाता है। दिनभर व्रत रखें। क्षमता न हो तो फलाहार ग्रहण किया जा सकता है।
  • सायंकाल में सूर्यास्त के समय पूजा स्थान में एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर इस पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके साथ ही लक्ष्मी के यंत्र विग्रह श्रीयंत्र को भी चौकी पर स्थापित करें।
  • विधि विधान से संपूर्ण उपचारों सहित पूजन करें। पूजन में हल्दी की गांठ अवश्य रखें।
  • माता लक्ष्मी, श्रीहरि और श्रीयंत्र पर केसर की बिंदी लगाएं।
  • माता लक्ष्मी की पूजा में लाल कमल, लाल कनेर या पीला कनेर, गुड़हल या गुलाब के पुष्प रखें।
  • पूजन कर श्रीसूक्त या ललितासहस्रनाम का पाठ करें।
  • माता लक्ष्मी को पांच प्रकार के फल, सूखे मेवे और मखाने की खीर का नैवेद्य लगाएं।
  • आरती करें। पुष्पांजलि करें। प्रसाद घर के सभी सदस्यों को बांटें और फिर स्वयं प्रसाद ग्रहण कर भोजन करें।
  • इस दिन सायंकाल में ही तुलसी के समीप घी का दीपक भी अवश्य लगाएं।

पूजा मुहूर्त

  • चर : सायं 5:11 से 6:45
  • लाभ : रात्रि 9:36 से 11:02
  • सिंह : दोप 2:25 से 4:36
  • वृश्चिक : रात्रि 9:01 से 11:16

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