जन्माष्टमी पर वृंदावन मंदिर में जुटे लाखों भक्त, सजी झांकियां, देखें Video, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त
Krishna Janmashtami 2025: देश भर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है, जो भगवान कृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव है। इस शुभ अवसर पर भक्तगण पूरे दिन उपवास रखे हुए हैं और भगवान के बाल स्वरूप, लड्डू गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
इस विशेष अवसर पर देश भर में स्थित कृष्ण मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है। हर मंदिर में भजन मंडलियों, रासलीला और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया है, साथ ही मनमोहक झांकियां भी प्रस्तुत की जा रही हैं। भगववान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा वृंदावन मंदिर, द्वारिका में स्थित द्वारिकाधीश मंदिर के अलावा अन्य राज्यों में स्थित कृष्ण मंदिर में भगवान कृष्ण के जन्म का भव्य आयोजन किया गया है।

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली, जहां शाम तक लगभग 25 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
वृंदावन में भी 10 लाख से ज़्यादा भक्त मौजूद रहे, और बांके बिहारी मंदिर के भक्तों की लंबी कतारें नजर आईं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर ठाकुरजी की पोशाक मथुरा के कारीगरों ने छह महीने में तैयार की है। इसमें सोने-चांदी के तारों का इस्तेमाल किया गया है और कपड़े में इंद्रधनुष के सात रंगों को दर्शाया गया है। मंदिर को 'ऑपरेशन सिंदूर' थीम पर सजाया गया है, जिसमें सिंदूरी फूलों का उपयोग किया गया है। ये फूल कोलकाता और बेंगलुरु से मंगवाए गए थे।
मंदिरों को किसी दुल्हन की तरह सजाया गया है। उत्तर प्रदेश के नूंह जिले को ब्रज भूमि के नाम से भी जाना जाता है। मुस्लिम बहुल नूंह जिले में भी हिंदू समाज के लोग पूरे हर्षोल्लास के साथ यह पर्व मना रहे हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए गए हैं।
मान्यता है कि ऐसा करने से श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जन्माष्टमी पर विधि-विधान से की गई पूजा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती है। आइए जानते हैं आज जन्माष्टमी की रात पूजन के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त क्या है।
कृष्ण जन्माष्टमी 2025: शुभ मुहूर्त
भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को हुआ था, इसीलिए इसे कृष्ण जन्माष्टमी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीकृष्ण का जन्म वृष लग्न, वृष राशि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस वर्ष जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की पूजा का मुहूर्त मध्यरात्रि 12 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा।
चंद्रोदय आज रात 11 बजकर 32 मिनट पर होगा। इसी शुभ अवधि में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और उनका जन्मोत्सव भी इसी समय मनाया जाएगा।
रोहिणी नक्षत्र का समय
वैसे तो श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, लेकिन इस साल जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन रहा है। रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त को सुबह 4 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 18 अगस्त तड़के 3 बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगा। इसलिए, भक्तों को आज रात बताए गए शुभ मुहूर्त में ही भगवान कृष्ण का पूजन करने का प्रयास करना चाहिए।
जन्माष्टमी पूजन विधि
जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद व्रत या पूजा का संकल्प लें। इसके बाद, जलाहार या फलाहार ग्रहण करें और सात्विक रहें। मध्यरात्रि में, श्रीकृष्ण की धातु की प्रतिमा को एक पात्र में रखें। प्रतिमा को सर्वप्रथम दूध, दही, शहद, शर्करा और घी से स्नान कराएं। सभी अर्पित की जाने वाली सामग्री को शंख में डालकर ही चढ़ाएं।
इसके पश्चात, श्रीकृष्ण को पीतांबर, पुष्प और प्रसाद अर्पित करें। फिर भगवान को झूले में बिठाकर झुलाएं। झूला झुलाते हुए प्रेमपूर्वक अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करें।
जन्माष्टमी पर मंत्र जाप
जन्माष्टमी पर आज पूजन करते समय श्रीकृष्ण नाम का ही जाप करना चाहिए, क्योंकि यह एक महामंत्र है। इसके अतिरिक्त, 'हरे कृष्ण' महामंत्र का भी जाप किया जा सकता है। प्रेम और आनंद की प्राप्ति के लिए 'मधुराष्टक' का पाठ करें। वहीं, श्रीकृष्ण को गुरु के रूप में प्राप्त करने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना उत्तम माना जाता है।
जन्माष्टमी का भोग
जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को माखन मिश्री का भोग लगाना सबसे शुभ माना जाता है। कुछ स्थानों पर भगवान कृष्ण को धनिया की पंजीरी का भोग भी लगाया जाता है। इन सबके अतिरिक्त, पंचामृत भी अवश्य अर्पित करें।












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