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Golden Temple: जानिए स्वर्ण मंदिर के बारे में ये दिलचस्प बातें, जहां हुआ सुखबीर सिंह बादल पर हमला

Golden Temple: शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल पर बुधवार सुबह जानलेवा हमला हुआ है, बेअदबी मामले में धार्मिक सजा काट रहे बादल पर आज सुबह गोली मारने की कोशिश की गई है हालांकि बादल सुरक्षित हैं और उन्हें खरोच तक नहीं आई।

लेकिन इस घटना से पूरे मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया, हालांकि स्थिति नियंत्रित में हैं और हमलावर को पकड़ लिया गया है।

Golden Temple

अब इस मामले में आगे क्या होता है, ये तो हमें पुलिस के जरिए पता चलेगा लेकिन इससे पहले जानते हैं आस्था के मानक Golden Temple यानी कि स्वर्ण मंदिर के बारे में खास बातें...

  • स्वर्ण मंदिर का असली नाम हरमंदिर साहिब (Harimandir Sahib) है, जिसका अर्थ है "भगवान का मंदिर।" इसे "दरबार साहिब" के नाम से भी जाना जाता है।
  • मंदिर के मुख्य भवन को शुद्ध सोने से ढका गया है। इसमें लगभग 750 किलो सोना लगा हुआ है, जिससे यह दुनिया के सबसे चमकदार धार्मिक स्थलों में से एक है।
  • स्वर्ण मंदिर का निर्माण 1581 में सिख गुरु रामदास जी ने शुरू किया था और इसे गुरु अर्जुन देव जी ने पूरा किया। इसके पुनर्निर्माण में महाराजा रणजीत सिंह ने अहम भूमिका निभाई।
  • 19वीं सदी में महाराजा रणजीत सिंह ने स्वर्ण मंदिर को सोने की परत से सजवाया, जिससे इसे "स्वर्ण मंदिर" कहा जाने लगा।
  • मंदिर के चारों ओर एक पवित्र जलाशय है, जिसे "अमृत सरोवर" कहा जाता है। माना जाता है कि इसका जल हर बीमारी और कष्ट को दूर करने की शक्ति रखता है।
  • रात में जब मंदिर की रोशनी जलती है और इसका प्रतिबिंब सरोवर में पड़ता है, तो यह दृश्य अद्भुत और मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है।
  • यह मंदिर सिख धर्म के अलावा सभी धर्मों के अनुयायियों के लिए खुला है। यहां जाति, धर्म और वर्ग का कोई भेदभाव नहीं है। स्वर्ण मंदिर के चार द्वार हैं, जो इस बात का प्रतीक हैं कि यह सभी दिशाओं और धर्मों के लोगों का स्वागत करता है।
  • यहां हर दिन लगभग 50,000 से 1,00,000 लोगों को मुफ्त भोजन दिया जाता है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी सामुदायिक रसोई माना जाता है। इस लंगर में किसी भी जाति-धर्म के लोग शामिल हो सकते हैं।
  • 1984 में ऑपरेशन ब्लूस्टार के दौरान इसे नुकसान पहुंचा था, लेकिन इसके बाद इसे दोबारा भव्य रूप से बनाया गया। इसका निर्माण मुगल और हिंदू वास्तुकला शैली का मिश्रण है। यह वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है।
  • मंदिर के अंदर सिखों के पवित्र ग्रंथ, गुरु ग्रंथ साहिब, को रखा गया है। इसका पाठ दिन-रात चलता रहता है। यहां के शबद-कीर्तन लोगों के कानों में अमृत घोल देते हैं। भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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