करवा चौथ: प्यार, विश्वास और त्याग का पर्व

भारत परंपराओं का देश है, प्यार, श्रद्धा और समर्पण के इस देश में व्रत और पूजा-पाठ भी सच्चे और पवित्र प्रेम की कहानी कहते हैं। जिसका ताजा प्रमाण है करवा-चौथ का व्रत।22 अक्टूबर को महिलाओं और लड़कियों का बहुप्रतिक्षित व्रत करवा चौथ है।

इस परंपरगत त्यौहार को हमारी मीडिया ने भी बहुत ग्लैमराइज्ड कर दिया है इसी कारण ये त्यौहार आज उन लोगों में भी काफी लोकप्रिय है जो अपने आप को आधुनिक कहते हैं। यह भारत के पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, और राजस्थान में मुख्य रूप से मानाया जाता है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।

पति की सलामती और तरक्की के लिए पत्नियों की ओर से रखे जाना वाला यह वर्त पत्नी के प्यार और समर्पण का सच्चा प्रमाण है वरना कोई किसी के लिए सुबह से शाम तक कैसे और क्यों बिना पानी के एक बूंद के रह सकता है। महिलाएं इस व्रत का बेसब्री से इंतजार करती हैं।

सुबह चार बजे उठकप महिलाएं सरगी खाती हैं और उसके बाद पूरे दिन बिना पानी के रहती हैं। शाम को पूजा करने के बाद चांद देखकर अपनी पति के हाथों पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं।

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कथा

कथा

धार्मिक किताबों के मुताबिक शाकप्रस्थपुर वेदधर्मा ब्राह्मण की विवाहिता पुत्री वीरवती ने करवा चौथ का व्रत किया था। नियमानुसार उसे चंद्रोदय के बाद भोजन करना था,परंतु उससे भूख नहीं सही गई और वह व्याकुल हो उठी। उसके भाइयों से अपनी बहन की व्याकुलता देखी नहीं गई और उन्होंने पीपल की आड़ में आतिशबाजी का सुंदर प्रकाश फैलाकर चंद्रोदय दिखा दिया और वीरवती को भोजन करा दिया।

व्रत से फिर से पाया पति

व्रत से फिर से पाया पति

परिणाम यह हुआ कि उसका पति तत्काल अदृश्य हो गया। अधीर वीरवती ने बारह महीने तक प्रत्येक चतुर्थी को व्रत रखा और करवा चौथ के दिन उसकी तपस्या से उसका पति पुनः प्राप्त हो गया।

सोलह श्रृंगार

सोलह श्रृंगार

भले ही पारंपरिक एक पूजा हो लेकिन इस व्रत ने फैशन का रूप धारण कर लिया है। स्त्रियां इस दिन भूखी-प्यासी रहकर सोलह श्रृंगार करती है। ताकि उनके पति उनके रूप और तपस्या को छोड़कर कहीं ना जाये।

बाजार में रौनक

बाजार में रौनक

आप बाजार में देखेगें तो आपको इसकी बानगी दिख जायेगी। औरों से अलग दिखने की चाहत में महिलाएं आपको साडियों की, मेंहदी की, चूड़ियों की दुकानों पर नजर आयेगीं। हर किसी की चाहत बस यही कि वो बेहद सुंदर दिखे।

हर जन्म का साथ

हर जन्म का साथ

तो चलिए इस पावन पर्व पर दुल्हन क तरह सजकर श्रद्धा के साथ इस व्रत करके अपने पति को सातों जनम के लिए अपना बना लीजिये। आपको मोहक रूप ओर प्रेम को देखकर आपके पति सिर्फ और सिर्फ आपके ही होकर रह जायेंगे यह हमारा दावा है।

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