Karwa Chauth 2020: द्रौपदी ने कृष्ण के कहने पर रखा था 'करवा चौथ व्रत'
नई दिल्ली। भारत और महाभारत एक दूसरे की परछाईं की तरह एक-दूसरे की हर बात आपस में समेटे हुए हैं। भारत की विराट सांस्कृतिक सभ्यता से कौन परिचित नहीं है? ठीक वैसे ही महाभारत की महानता को कौन नकार सकता है? भारत में संस्कृति के जितने भी रूप चलन में आए हैं, उन सबकी झलक महाभारत में मिलती ही है। जब बात करवा चौथ की हो, तो महाभारत में इससे सम्बद्ध घटना न मिले, यह असंभव-सी बात है।

तो आज जानते हैं महाभारत में करवा चौथ व्रत का संदर्भ, जिसे द्रौपदी ने श्री कृष्ण के बताने पर अपने प्रिय पति अर्जुन के लिए रखा था...
अर्जुन को महाभारत में संसार के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर, भगवान कृष्ण के प्रिय सखा और अनुयायी तथा द्रौपदी के प्रिय पति के रूप स्थान मिला है। जैसा कि सभी जानते हैं कि माता कुंती के भ्रामक वचन और आज्ञा के चलते द्रौपदी पांचों पांडवों की पत्नी बनी थीं। अर्जुन ने द्रौपदी को स्वयंवर की चुनौती पूर्ण कर जीता था, इसीलिए वे अर्जुन से अधिक लगाव रखती थीं। अर्जुन अक्सर ही दिव्यास्त्रों को पाने के लिए तप करने वन में जाया करते थे। एक बार ऐसे ही वे तप करने अज्ञातवास पर गए। लंबा समय बीत गया, पर अर्जुन वापस ना आए। अज्ञातवास होने के कारण कोई नहीं जानता था कि अर्जुन हैं कहां, इसलिए उनकी कोई जानकारी भी नहीं मिल पा रही थी। पति की इस दीर्घ अनुपस्थिति ने द्रौपदी को व्यग्र कर दिया।
'तुम अर्जुन की रक्षा के लिए करवा चौथ का व्रत रखो'
अर्जुन की तरह ही द्रौपदी के भी मुख्य सखा और पालनहार श्री कृष्ण ही थे। द्रौपदी ने श्री कृष्ण को संपूर्ण घटनाक्रम बताकर उचित मार्गदर्शन देने को कहा। तब श्री कृष्ण ने कहा- हे सखे! पति पर आने वाले समस्त संकटों को काटने की क्षमता पत्नी में ही होती है। वास्तव में इस संसार में पति-पत्नी ही एक दूसरे के मुख्य सखा और संरक्षक होते हैं। दोनों ही एक-दूसरे की रक्षा करने में सक्षम होते हैं। तुम इस अज्ञात भय से अपना संयम ना खो। तुम अर्जुन की रक्षा के लिए करवा चौथ का व्रत रखो। मैं तुम्हें इस व्रत का पूरा विवरण देता हूं। यह व्रत स्वयं महाशिव ने अपनी पत्नी पार्वती को सर्वप्रथम बताया था और उन्होंने शिव जी के लिए व्रत रखा था।
शिक्षा
ऐसा कहकर श्री कृष्ण ने द्रौपदी को करवाचौथ व्रत की संपूर्ण कथा सुनाई और समस्त विधि- विधान समझाया। श्री कृष्ण के निर्देशानुसार द्रौपदी ने पूरी श्रद्धा से करवा चौथ का व्रत रखा और व्रत का समापन होते ही अर्जुन दिव्यास्त्र प्राप्त कर अपनी पत्नी के पास लौट आए।












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