Kartik Snan Katha 2022: पढ़ें कार्तिक स्नान की कथा

Kartik Snan ki Kahani : आज से ईश्वर के प्रिय मास कार्तिक की शुरुआत हुई है। मोक्ष का महीना कहे जाने वाले इस मास में लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं। कहते हैं ऐसा करने से इंसान के सारे कष्टों का अंत हो जाता है और उसे सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। वैसे तो इस महीने के बारे में बहुत सारी कहानियां हैं, लेकिन एक कहानी काफी रोचक है, जिसे हर किसी को जानना चाहिए।

Kartik Snan Katha 2022:

कहते हैं एक गांव में गरीब बुढ़िया रहती थी। उसका अपना सगा कोई नहीं करती थी। वो दिन-रात कान्हा जी की भक्ति में लीन रहा करती थी और रोज सुबह गंगा स्नान करने जाती थी। उस निर्धन बुढ़िया की भक्ति से भगवान कृष्ण बहुत ज्यादा खुश थे और वो खुद उसकी कुटिया की खिड़की पर एक कटोरे में खिचड़ी रखकर रोज चले जाते थे, जिसे कि वो बुढ़िया नहाकर आने के बाद खा लेती थी। बरसों तक ये सिलसिला चलता रहा लेकिन उसकी पड़ोसन को इस बात की काफी जलन थी।

दो सुंदर फूल खिल गए

एक दिन जब बुढ़िया नहाने गई थी और कृष्ण जी उसके घर की खिड़की पर खिचड़ी रखकर गए तो वो दुष्ट पड़ोसन ने वो खिचड़ी का कटोरा घर के पिछवाड़े फेंक दिया। जब गंगास्नान के बाद बुढ़िया घर लौटी तो उसे वहां कटोरा मिला नहीं, बुढ़िया बहुत दुखी हुई और भूखी ही रह गई। पड़ोसन ये सब देखकर बहुत खुश हुई लेकिन जहां उसने खिचड़ी फेंकी थी वहां पर एक पौधा उग आया और उसमें दो सुंदर फूल खिल गए, जिनकी सुंगध काफी अलग थी।

Kartik Snan Katha 2022

एक बार राजा उधर से गुजरे तो उन्हें वो सुगंध काफी अच्छी लगी, वो दोनों फूल तोड़कर रानी के लिए ले आए, जिसे सुंघते ही रानी गर्भवती हो गईं और उन्होंने 9 महीने बाद दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। दोनों राजकुमार जब बड़े हुए तो किसी से बात नहीं करते थे लेकिन अक्सर जंगल में शिकार करने चले जाते थे। जहां उनकी मुलाकात उसी बुढ़िया से होती थी। ये बात जब राजा को पता चली तो वो बहुत हैरान हुए , उन्होंने तुरंत सैनिकों को उसे लाने के लिए भेजा।

Kartik Snan Katha 2022

दरबार में जब वो बुढ़ी महिला पहुंची तो राजा ने पूछा कि मेरे दोनों बेटे किसी से बात नहीं करते हैं लेकिन आप से बात करते हैं? क्यों और कैसे? इस पर बुढ़िया ने कहा कि 'मुझे ये सब तो नहीं पता लेकिन हां मैं तो अपना खिचड़ी वाला कटोरा खोज रही थी, तब एक दिन ये दोनों मुझे मिले और कहने लगे कि मैं आपका कटोरा हूं और मैं ही आपकी खिचड़ी हूं। और तब से ये मुझसे मिलने आने लगे। राजा को यह सबकर सुनकर काफी हैरानी हुई लेकिन उसने बुढ़िया को प्रणाम किया और उन्हें राज दरबार में विशेष अतिथि बनाकर हमेशा के लिए रख लिया।'

राजकुमार काफी प्रसन्न हुए

ये बात देखकर दोनों राजकुमार काफी प्रसन्न हुए, उन्होंने तुरंत राजा को प्रणाम किया और दोनों ने बोलना प्रारंभ कर दिया। संयोग से ये सब कार्तिक माह में हुआ था, तब से ही कार्तिक मास में पवित्र नदियों में स्नान करने और घरों में इस दिन खिचड़ी बनाने का रिवाज बन गया।

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