Kartik Ekadashi 2017: कार्तिक एकादशी को करें ये उपाय, मिलेगा विष्णु-लक्ष्मी का आशीर्वाद

नई दिल्ली। वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी कार्तिक शुक्ल एकादशी मानी गई है। इसे देव उठनी एकादशी, देव प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन चातुर्मास के बाद भगवान विष्णु जागते हैं और समस्त संसार को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस दिन से विवाह प्रारंभ हो जाते हैं। इसलिए शास्त्रों में इस एकादशी का सर्वाधिक महत्व बताया गया है। इस एकादशी के व्रत को करने का तो अपना महत्व है ही इस दिन सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए कई तरह के उपाय भी किए जाते हैं। विवाह सुख के लिए: जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही हो। कई प्रयासों के बाद भी विवाह की बात नहीं बन पा रही हो, वे युवक-युवतियां देवउठनी एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में जग जाएं। जब आकाश में तारे हों, तभी स्नान करें और लक्ष्मी-विष्णु की पूजा कर विष्णुसहस्रनाम के 7 पाठ करें। महालक्ष्मी और विष्णु को मिश्री का भोग लगाकर अपनी मनोकामना कहें। उनके शीघ्र विवाह का मार्ग प्रशस्त होगा।

Kartik Ekadashi 2017: कार्तिक एकादशी को करें ये उपाय, मिलेगा विष्णु-लक्ष्मी का आशीर्वाद

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      • दांपत्य सुख के लिए: जिन दंपतियों का विवाह कष्टपूर्ण चल रहा हो। पति-पत्नी के संबंधों कटुता हो, वे देवउठनी एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण का मंत्र ओम् कृं कृष्णाय नमः मंत्र की एक माला जाप करें। श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाएं। वैवाहिक जीवन में शांति आएगी और पति-पत्नी के संबंध मधुर बनेंगे।
      • धन-समृद्धि की प्राप्ति के लिए: आर्थिक संकटों और कर्ज से मुक्ति के लिए एकादशी का व्रत करें। शाम के समय पूजा स्थान में लाल रंग के उनी आसान पर बैठकर ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की एक माला जाप करें। भगवान विष्णु को हलवे का नैवेद्य लगाएं और तुलसी में प्रतिदिन शाम के समय दीपक लगाना प्रारंभ करें।
      • रोग मुक्ति के लिए: एकादशी के दिन से प्रारंभ करके लगातार 21 दिन पीपल में कच्चा दूध और पानी मिश्रित करके चढ़ाना प्रारंभ करें। पीपल के वृक्ष की जड़ से थोड़ी सी गीली मिट्टी लेकर मस्तक और नाभि पर लगाएं। रोग मुक्ति होने लगेगी।
      • संकटों के नाश के लिए: यदि जीवन में लगातार कोई न कोई परेशानी बनी हुई है। बेवजह के संकट आ रहे हों तो एकादशी के दिन शाम के समय तुलसी विवाह संपन्न कराएं। किसी कन्या को भोजन करवाकर उसे वस्त्र, श्रंृगार का सामान भेंट दें।

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