Rama Ekadashi 2024: रमा एकादशी आज, क्या है पूजा विधि और मुहूर्त
Rama Ekadashi 2024 Aaj : कार्तिक मास में आने वाले प्रत्येक व्रत, पर्व, त्योहार का अपना विशिष्ट महत्व होता है। इस मास में सनातन का सबसे बड़ा त्योहार दीपावली आता है।
वैसे तो दीपावली को पंच पर्व कहा जाता है जो धनतेरस से लेकर भाईदूज तक होता है किंतु वास्तव में यह पर्व सप्तदिवसीय होता है जो रमा एकादशी से प्रारंभ हो जाता है।

रमा एकादशी, गोवत्स द्वादशी, धनतेरस, रूप चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज। इस बार रमा एकादशी और गोवत्स द्वादशी आज के दिन एकसाथ आए हैं।
एकादशी तिथि 27 अक्टूबर को सूर्योदय पूर्व प्रात: 5:56 से प्रारंभ हो जाएगी जो दूसरे दिन अर्थात् 28 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद प्रात: 7:50 बजे तक रहेगी। इस प्रकार यह एकादशी दो सूर्योदय को स्पर्श कर रही है, इसलिए एकादशी का व्रत दूसरे सूर्योदय वाले दिन 28 अक्टूबर को किया जाएगा। इसी दिन गोवत्स द्वादशी भी रहेगी। इसके साथ ही मंगल का भी पुष्य नक्षत्र में भ्रमण प्रारंभ होगा।
भगवान विष्णु का श्रृंगार किया जाता है
रमा एकादशी पर भगवान विष्णु का आकर्षक श्रृंगार कर पूजन किया जाता है। इस दिन भागवत महापुराण के पाठ का महत्व बताया गया है। इससे अनजाने में हुए पापों का क्षय होता है। मनुष्य के जीवन ें भौतिक और आध्यात्मिकता का उत्थान होता है। रमा एकादशी व्रत के प्रभाव से व्यक्ति समस्त प्रकार के सुखों में रमण करता है इसलिए इसे रमा एकादशी कहा जाता है।
रमा एकादशी की पूजा की विधि
रमा एकादशी के दिन प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर एक चौकी पर भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। उसके दोनों ओर केले के पत्ते सजाएं। भगवान विष्णु का षोडशोपचार पूजन करें। भगवान को तुलसी दल अ श्य अर्पित करें। केले का नैवेद्य लगाएं। रमा एकादशी की कथा सुनें या पढ़ें। पूरे दिन भर व्रत रखकर निराहा रहें। आवश्यकतानुसार फलाहार ग्रहण करें। रात्रि में दीपदान करें। दूसरे दिन प्र त: स्नानादि करके व्रत का पारणा करें। किसी ब्राह्मण दंपती को भोजन करवाएं। दान-दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें फिर स्वयं व्रत खोलें।
रमा एकादशी व्रत क्यों करना चाहिए
- रमा एकादशी का व्रत समस्त प्र ार के सुख प्रदान करता है।
- इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के अनेक जन्मों में किए गए अनजाने पापों का नाश होता है।
- रमा एकादशी का व्रत संतान सुख, समृद्धि, धन की कामना रखने वाले मनुष्यों को अवश्य करना चाहिए।
- अनजाने में किए गए गोहत्या, ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिलती है।
- मृत्यु के पश्चात विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
एकादशी का समय
- एकादशी प्रारंभ : 27 अक्टूबर प्रात: 5:56
- एक दशी पूर्ण : 28 अक्टूबर प्रात: 7:50
- पारणा : 29 अक्टूबर प्रात: 6.30 से 8.46
गोवत्स द्वादशी पूजा मुहूर्त
- प्रदोषकाल : सायं 5:51 से रात्रि 8:23
- अवधि 2 घंटे 32 मिनट
गोवत्स द्वादशी पर गाय-बछड़े की पूजा की जाती है। पूजा के पश्चात गाय बछड़ों को गेहूं से निर्मित उत्पाद खिलाए जाते हैं।












Click it and Unblock the Notifications