FIFA World Cup 2026: मेक्सिको में विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार का बड़ा दावा, ओपनिंग सेरेमनी का बताया प्लान!
FIFA World Cup 2026: फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) के उद्घाटन मुकाबले से ठीक पहले मेक्सिको में सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ गया है। राजधानी मेक्सिको सिटी में शिक्षकों के संगठन और सामाजिक कार्यकर्ताओं के उग्र विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति क्लॉडिया शीनबाम (Claudia Sheinbaum) ने सोमवार को देश और दुनिया को आश्वस्त किया कि गुरुवार (11 जून) को होने वाली ओपनिंग सेरेमनी पूरी तरह सुरक्षित, शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में संपन्न होगी।
क्यों हो रहा है विरोध? गुरुवार के मैच पर संकट का साया (FIFA World Cup 2026)
मेक्सिको के शिक्षकों के एक बड़े संघ ने सरकार से वेतन वृद्धि और पेंशन सुधारों की मांग को लेकर मोर्चा खोल रखा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे गुरुवार को मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच होने वाले उद्घाटन मैच के दौरान स्टेडियम के बाहर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेंगे। शिक्षकों की इस मांग को अयोत्ज़िनापा शिक्षक कॉलेज के उन सैकड़ों छात्रों का भी समर्थन मिल रहा है, जो साल 2014 में लापता हुए 43 छात्रों के मामले में न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

शहर में तनाव का माहौल, भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद
राजधानी मेक्सिको सिटी की स्थिति इस समय संवेदनशील बनी हुई है। सोमवार को सुरक्षा बलों ने राजधानी में प्रवेश कर रहे प्रदर्शनकारियों के एक बस काफिले से 59 देशी विस्फोटक उपकरण (IEDs) बरामद किए, जिसकी पुष्टि पुलिस ने सोशल मीडिया पर की है। इससे पहले पिछले हफ्ते ऐतिहासिक जोकालो स्क्वायर के पास पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल करना पड़ा था, जहां वर्ल्ड कप के लिए एक बड़ा फैन जोन और स्क्रीन लगाई गई है।
व्यापार और पर्यटन प्रभावित, बातचीत का दौर जारी
प्रदर्शनकारियों ने डाउनटाउन इलाके में लगीं फुटबॉल खिलाड़ियों की प्रतीकात्मक मूर्तियों को भी नुकसान पहुंचाया है। सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने ऐतिहासिक चौकों और रास्तों को लोहे के भारी बैरिकेड्स से बंद कर दिया है। वर्ल्ड कप के ठीक पहले शहर के मुख्य हिस्सों में प्रदर्शनकारियों के तंबू (टेंट कैंप) लगने से स्थानीय व्यापार ठप हो गया है और विदेशी पर्यटक असमंजस में हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि बैरिकेड्स के कारण रास्ते बंद होने से ग्राहक और पर्यटक दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
दूसरी ओर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का दौर भी जारी है। राष्ट्रपति शीनबाम की सरकार ने पेंशन प्रशासन के लिए एक नई सरकारी कंपनी बनाने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन पुरानी पेंशन व्यवस्था को पूरी तरह बहाल करने से इनकार कर दिया है। सरकार का तर्क है कि ऐसा करने पर सरकारी खजाने पर करीब $400 मिलियन (लगभग ₹3,300 करोड़ से अधिक) का भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा, जिसे वहन करना संभव नहीं है।















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