Jagannath Rath Yatra 2025: आज से शुरू जगन्नाथ रथ यात्रा, जानिए कौन खींच सकता है रथ?
Jagannath Rath Yatra 2025 Hindi: भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र त्योहारों में से एक रथ यात्रा 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं, इसे 'गुंडिचा यात्रा' भी कहते हैं। आपको बता दें कि यह पर्व हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है और वो पावन दिन आज है, जिसके लिए भव्य तैयारियां की गई हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा से मोक्ष मिलता है
इस दिन ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विशाल रथों का भव्य जुलूस निकाला जाता है, जिसे देखने और उसमें भाग लेने लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से आते हैं। ये अकेली पूजा है, जिसमें जगनन्नाथ भगवान के साथ भाई-बहनों की पूजा होती है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा तीन अलग-अलग रथों में सवार होकर, गुंडीचा माता के मंदिर (करीब 3 किमी दूर) तक की यात्रा करते हैं, जहां वे 10 दिन तक विश्राम करते हैं।
तीन रथों के नाम और विशेषताएं (Jagannath Rath Yatra 2025)
- तालध्वज रथ - भगवान बलभद्र का रथ, जिसमें 14 पहिए होते हैं, इसे खींचने वाली रस्सी को 'बासुकी' कहा जाता है।
- दर्पदलन रथ - देवी सुभद्रा का रथ, जिसमें 12 पहिए होते हैं, इसकी रस्सी का नाम 'स्वर्णचूड़ा' नाड़ी होता है।
- नंदीघोष रथ - भगवान जगन्नाथ का रथ, सबसे पीछे चलता है. इसमें 16 पहिए होते हैं और इसकी रस्सी को 'शंखाचूड़ा नाड़ी' कहा जाता है।
कौन खींच सकता है रथ? (Jagannath Rath Yatra 2025)
- रथ यात्रा में कोई भी श्रद्धालु, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या समुदाय से हो - रथ खींच सकता है।
- माना जाता है कि रथ की रस्सी को खींचने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यदि रथ न खींच पाएं तो?
यदि कोई रथ नहीं खींच पाता, लेकिन भक्ति भाव से इस यात्रा में शामिल होता है, तो उसे हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व (Jagannath Rath Yatra 2025)
- यह परंपरा हजारों साल पुरानी है और इसे 'भगवान की सालाना यात्रा' के रूप में देखा जाता है।
- यह एकमात्र ऐसा अवसर है जब भगवान मंदिर से बाहर निकलकर आम भक्तों को दर्शन देते हैं।
- इस दौरान 'पहांडी' नामक अनूठी रस्म होती है, जिसमें भगवानों को झूमते हुए रथ पर लाया जाता है।
- इस यात्रा में जो भी शामिल होता है उसके सारे कष्टों का अंत होता है।












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