Must Read: राखी या रक्षाबंधन से जुड़ी खास और रोचक बातें
बैंगलोर। इस महीने की 18 तारीख को भाई-बहन के प्यार का त्योहार राखी है। राखी हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनायी जाती है।
2016 रक्षाबंधन: राखी बांधने का सही मुहूर्त एवं समय

आईये जानते हैं राखी के पावन पर्व से जुड़ी खास बातें..
- रक्षाबन्धन सावन का आखिरी दिन होता है इसीकारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं।
- राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बांधती हैं लेकिन हमारे देश में ब्राह्मणों, गुरुओं और नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बांधी जाती है।
- देश में कहीं जगह वृक्ष को और भगवान को भी राखी बांधने की परंपरा है।
- इस दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरुष भाईचारे के लिये एक दूसरे को भगवा रंग की राखी बांधते हैं।
- हिन्दू धर्म के सभी धार्मिक अनुष्ठानों में रक्षासूत्र बांधते समय पण्डित या आचार्य संस्कृत में एक श्लोक का उच्चारण करते हैं, जो कि राजा बलि से जुड़ा हुआ है जिसमें कहा जाता है जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बांधता हूँ, तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।
- भारत के कई राज्यों में इस दिन बहनों की ओर से भाई के कान के ऊपर भोजली या भुजरियां लगाने की परंपरा है, जो कि भाईयों के लंबी उम्र के लिए किया जाता है।
- देश से बाहर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में ब्राह्मण और क्षेत्रीय समुदाय में रक्षा बन्धन पर गुरू के हाथ में राखी बांधी जाती है।
- राखी प्यार और वचन का त्यौहार है इसलिए इसका प्रयोग भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में जन जागरण के लिये किया गया था, जो कि गुरूदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने चलाया था।
- अमरनाथ यात्रा भी रक्षाबन्धन के दिन पूरी होती है। माना जाता है कि इसी दिन हिमानी शिवलिंग भी आकार ग्रहण करता है।
- महाराष्ट्र राज्य में यह त्योहार नारियल पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।
- इस दिन मराठी लोग नदी या समुद्र के तट पर जाकर अपने जनेऊ बदलते हैं और समुद्र की पूजा करते हैं।
- राजस्थान में इस दिनरामराखी और चूड़ाराखी या लूंबा बांधने का रिवाज़ है।
- रामराखी केवल भगवान को ही बांंधी जाती है जबकि चूड़ा राखी भाभियों को नंदें बांधती हैं।
- तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र और उड़ीसा के दक्षिण भारतीय ब्राह्मण इस पर्व को अवनि अवित्तम कहते हैं।
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