देश भर में धूमधड़ाके से मनी दीवाली, रात भर बजते रहे पटाखे

दिल्ली में रात दस बजे के बाद पूरी दिल्ली में जगह-जगह पटाखे बजते रहे। जबकि कोर्ट के आदेश के मुताबिक रात दस से सुबह छह बजे तक आवाज वाले पटाखों के चलाने पर पाबंदी है। हालांकि दिल्ली की दिवाली शांति से गुजरी । आतंकवादी दिवाली के आस-पास धमाका करना चाहते थे। उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पाए। लेकिन पटाखे की चिंगारी के कारण रुपनगर के रुई गोदाम में आग लगने से लाखों का माल खाक हो गया।
दिल्ली में प्रकाश का पर्व दीवाली परंपरागत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की विजय के प्रतीक स्वरूप मनाया जाता है। यह जीवन में शांति, संपन्नता और खुशहाली लाने का प्रतीक पर्व भी है। बुधवार को सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और शाम ढलते पूरी दिल्ली रोशनी से जगमगा उठी। दीवाली त्योहार में धन की देवी लक्ष्मी की पूजा का खास महत्व है। शाम ढलने के बाद शुभ मुहूर्त में लोग अपनी श्रद्धा के मुताबिक लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की पूजा करते हैं।
बाजारों, मंदिरों और प्रमुख स्थलों पर भीड़भाड़ के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। सुरक्षा बलों को आशंका थी कि आतंकवादी हमला कर दिवाली को काली करना चाहते हैं।
अमावस्या के दिन दीपावली मनाई जाती है। इस दिन दीए जलाकर धन की देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। रावण के वध के बाद राम के अयोध्या लौटने की खुशी में भी यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक स्वरूप मनाया जाता है। दीवाली मनाने को लेकर और भी मान्यताएं हैं। कहा जाता है कृष्ण ने कार्तिक अमावस्या के दिन नरकासुर का वध किया था, लक्ष्मी जी आज ही के दिन समुद्र से प्रकट हुई थीं।
दिल्ली में सुबह से ही मंदिरों में लोगों की भीड़ देखी गई। बाजारों में लोगों की काफी चहल-पहल रही और शाम तक लोग खरीदारियों में जुटे रहे। अन्य दिनों की अपेक्षा बाजार आज जल्दी खुल गए थे। पटाखों एवं मिठाइयों की दुकानों पर लोगों का तांता लगा रहा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। दिल्लीवासियों ने हर बार की तरह इस बार भी घरों रंगोली से सजाया। इसे बनाने के लिए रंगबिरंगी मोमबत्तियों, रंगीन पाउडर एवं दीयों का प्रयोग किया गया। इस बार भी दिवाली पर चीनी सामान से बाजार अटा पड़ा था।












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