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Holi 2019: रंग खेलने से पहले जरूर जानिए होली के बारे में ये दिलचस्प बातें

नई दिल्ली। रंगों और खुशियों के पर्व होली (Holi 2019) के बारे में कहा जाता है कि उमंगों और उत्साह के इस त्योहार पर तो दुश्मन भी गले मिल जाते हैं। होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है बल्कि यह पर्व है प्रेम का, उत्साह का , एक-दूसरे में खो जाने का, होली (Holi 2019) के रंग केवल इंसान के चेहरे को ही रंगीन नहीं करते हैं बल्कि वो इंसान के जीवन को भी रंगीन बना देते हैं इसलिए होली मनाने से पहले सभी को होली (Holi 2019) पर्व के बारे में विस्तार से जानना बेहद जरूरी है। आपको बता दें कि होली हमेशा फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनायी जाती है। यह पर्व दो दिनों का होता है, पहले दिन 'होलिका दहन' होता है और दूसरे दिन रंग खेला जाता है, जिसे 'धुरड्डी', 'धुलेंडी', 'धुरखेल' या 'धूलिवंदन' कहा जाता है।

भक्त प्रहलाद की कहानी

भक्त प्रहलाद की कहानी

होली (Holi 2019) को लेकर वैसे तो बहुत सारे किस्से और कहानियां हैं लेकिन इन सब में सबसे ज्यादा मानक भक्त प्रहलाद की कहानी है, जिनके पिता का नाम हिरण्यकश्यप था, जो कि एक राक्षस थे, वो खुद को भगवान मानने लगे थे और जो कोई उनका विरोध करता था तो उसे वो मार देते थे लेकिन जब उनके बेटे प्रहलाद ने उनका विरोध किया तो उन्होंने अपनी बहन होलिका से कहा कि वो इसे आग में लेकर बैठ जाये क्योंकि होलिका को वरदान मिला था कि वो जल नहीं सकती लेकिन हुआ इससे उलट, वो जल गई और प्रहलाद बच गया तब से 'होलिका-दहन' होने लगा, जो बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है।

अलबरूनी ने किया होली का जिक्र

अलबरूनी ने किया होली का जिक्र

होली (Holi 2019) का पर्व भारत में काफी पुराने वक्त से मनाया जा रहा है, जिसका जिक्र मुस्लिम साहित्यों में भी मिलता है। सुप्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने भी अपने ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में होलिकोत्सव का वर्णन किया है, जिनके मुताबिक यह पर्व लोगों के बीच खुशी बांटने के लिए मनाया जाता था।

मुगल काल में भी खेली जाती थी होली

मुगल काल में भी खेली जाती थी होली

मुगल काल में होली के किस्से हैं, अकबर का जोधाबाई के साथ और जहांगीर का नूरजहां के साथ होली खेलने का वर्णन मिलता है। ईद-ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी इतिहास में वर्णन है कि शाहजहां के ज़माने में होली को ईद-ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी (रंगों की बौछार) कहा जाता था।

राग और रंग का संगम

राग और रंग का संगम

होली के दिन राग और रंग का संगम होता है इसलिए लोग रंग खेलते समय जमकर नाचते-गाते हैं। फाल्गुनी होली को फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे 'फाल्गुनी' भी कहते हैं। होली के समय किसान काफी खुश होता है क्योंकि इस समय फसल पक चुकी होती है, सर्दी जा चुकी होती है और मौसम सुहावना होता है इसी कारण मन खुश होता है जिसकी वजह से ही होली को कवियों और साहित्यकारों ने मस्ती का त्यौहार कहा है क्योंकि इस वक्त हर कोई खुश और मस्त होता है।

पूतना वध

पूतना वध

ऐसा भी माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन पूतना नामक राक्षसी का वध किया था। इसी खु़शी में गोपियों और ग्वालों ने रासलीला की और रंग खेला था इसी कारण बृज में होली की बहुत मान्यता है।तो वहीं कुछ लोगों का मानना है कि होली में रंग लगाकर, नाच-गाकर लोग भगवान शिव को याद करते हैं।

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