अच्छी संगत से निखरते हैं गुण, यही है सफलता का बड़ा राज

नई दिल्ली। आपने अक्सर बड़ों को यह कहते हुए सुना होगा कि दोस्त अच्छे होना चाहिए। कई बार ऐसा भी होता है कि अभिभावकों और बच्चों के बीच दोस्तों को लेकर बहस हो जाती है। माता-पिता को लगता है कि बच्चे का यह दोस्त सही नहीं है और उसके साथ रह कर हमारा बच्चा बिगड़ जाएगा। वहीं दूसरी तरफ बच्चे को लगता है कि माता-पिता उसकी भावनाओं को समझ ही नहीं रहे हैं।

अच्छी संगत से निखरते हैं गुण, यही है सफलता का बड़ा राज

उसके अभिन्न मित्र का साथ छोड़ने को बोल रहे हैं। आखिर एक दोस्त के साथ से कोई कैसे बिगड़ सकता है? कभी ऐसा होता है कि अभिभावक अपने बच्चों को किसी खास बच्चे से दोस्ती करने, उसके साथ समय बिताने को कहते हैं। उनका यह मानना होता है कि अमुक बच्चा बहुत अच्छा है और इसके साथ रहकर हमारा बच्चा और अच्छा बन जाएगा, लेकिन यहां भी वही समस्या आती है। बच्चा इस बात से सहमत ही नहीं होता।

तो आइए, आज हम एक कथा के माध्यम से यह देखते हैं कि अच्छी संगत कैसे चुपचाप अपना प्रभाव छोड़ती है और अपने साथ से ही दूसरे का व्यक्तित्व कैसे निखार देती है..

एक बार की बात है। भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ देशाटन पर जा रहे थे। भगवान अपने शिष्यों को राह में पड़ने वाली छोटी- छोटी बातों, वस्तुओं और घटनाओं के माध्यम से जीवन की गहन शिक्षा देते जाते थे। कभी वे कथाओं के माध्यम से जटिल बातों को भी आसानी से अपने शिष्यों के हृदय में उतार दिया करते थे। कभी उन वस्तुओं का दृष्टांत दिया करते, जो देखने में मामूली लगती थीं, पर उनका सार गहन होता था।

उद्यान में सुंदर फूल खिले थे

ऐसे ही एक बार उनका दल एक उद्यान के पास रूका। उद्यान में भांति-भांति के सुंदर फूल खिले हुए थे। बुद्ध अपने शिष्यों के साथ विश्राम कर रहे थे। उन्होंने एक शिष्य को बुला कर कहा- वत्स! सामने गुलाब के सुंदर पुष्प खिले हैं, उनके पौधों के नीचे से थोड़ी मिट्टी ले आओ। इसके साथ ही उन्होंने दूसरे शिष्य से कहा- वत्स! उस तरफ जंगली पौधे पर भी सुंदर पुष्प खिले हैं। तुम उसके नीचे की थोड़ी सी मिट्टी ले आओ।

इन दोनों की गंध सूंघो

दोनों ही शिष्य तुरंत जाकर मिट्टी का एक-एक ढेला ले आए। भगवान बुद्ध ने दोनों ही ढेले शिष्यों को देते हुए कहा कि तुम सब इन दोनों की गंध सूंघो और बताओ कि इनमें क्या अंतर है? शिष्यों ने बताया कि गुलाब के पौधे की मिट्टी में से सुगंध आ रही है, जबकि दूसरे ढेले में ऐसी कोई विशेषता नहीं है। भगवान ने कहा-जानते हो, गुलाब के पौधे की मिट्टी से सुगंध क्यों आ रही है? इस पौधे पर जब भी गुलाब खिले, पंखुडि़यां नीचे मिट्टी में गिरीं। इस पौधे को जब भी पानी दिया गया, फूलों को स्पर्श कर पानी नीचे धरती पर गिरा और उसने इस मिट्टी को भी सुगंधयुक्त बना दिया। ठीक यही प्रभाव अच्छी संगत का होता है। यदि आपकी संगत अच्छी है, तो वह बिना प्रयास आपके व्यक्तित्व को गुणवान बना देती है। उसके साथ रहने मात्र से ही आप इस सुगंधयुक्त मिट्टी के समान प्रशंसनीय और स्वीकार्य हो जाते हैं। इसके विपरीत सामान्य संगत इस जंगली पौधे जैसी निष्प्रभावी रहती है, वहीं यदि संगत बुरी हो, तो वह आपको कलंकित करती है जैसे विषैले पौधों के आसपास की वायु भी विषैली हो जाती है। इस तरह भगवान बुद्ध ने शिष्यों को जीवन का गहन मर्म बातों ही बातों में एक छोटे- से दृष्टांत से समझा दिया।

तो इसलिए बुजुर्ग कहते हैं कि संगत अच्छी रखो

इस कथा को पढ़कर आप भी समझ ही गए होंगे कि घर में बड़े बुजुर्ग क्यों कहते हैं कि संगत अच्छी रखो। सीधी सी बात है कि संगत का असर आपको बिगाड़ भी सकता है और सुधार कर बेहतर भी बना सकता है। तो जब भी दोस्त बनाएं, एक बार परख लें और अच्छे लोगों से ही संपर्क रखें, ताकि आपका जीवन सुंदर और व्यक्तित्व मनमोहक बन सके।

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