Guru Purnima 2025: 'गुरु का साथ, जीवन की सौगात', आज के दिन अपने गुरुओं को इस तरह से कहें धन्यवाद
Guru Purnima 2025: गुरु पूर्णिमा हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व है, ये आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह दिन गुरुओं को सम्मान अर्पित करने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का होता है। आज का दिन बहुत पावन है। जीवन में सही मार्ग पर चलने के लिए एक सच्चे मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है। इस शुभ अवसर पर हम सभी को अपने गुरुओं का आभार प्रकट करना चाहिए और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।
गुरु का स्थान हमारे जीवन में ईश्वर से भी ऊपर माना गया है, क्योंकि वे हमें अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।

गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर आप भी अपने गुरुओं को खास संदेश भेजें और इस दिन को यादगार बनाएं...
- गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर आपके जीवन में ज्ञान, सफलता और समृद्धि का प्रकाश फैले। गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं
- अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर जीवन को ज्ञान से प्रकाशित करें - यही है गुरु की महिमा। गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं
- गुरु वही जो अंधकार से उजाले की ओर ले जाए, असत्य से सत्य की ओर बढ़ाए। गुरु पूर्णिमा की पावन बधाई!
- जीवन में अगर गुरु मिल जाएं तो हर राह आसान हो जाती है। हैप्पी गुरु पूर्णिमा।
- जिनके ज्ञान से रोशन हुआ जीवन - उन्हें शत् शत् नमन। गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं!
- गुरु बिन ज्ञान नहीं, और ज्ञान बिन सम्मान नहीं। हैप्पी गुरु पूर्णिमा।
- गुरु का स्थान सबसे ऊंचा - उनका आशीर्वाद है सबसे सच्चा।
- गुरु वही जो सत्य का मार्ग दिखाए, हैप्पी गुरु पूर्णिमा।
- गुरु है सच्चे मार्गदर्शक , हैप्पी गुरु पूर्णिमा।
- गुरु का आशीर्वाद - सफलता की पहली सीढ़ी। हैप्पी गुरु पूर्णिमा।
- गुरु के बिना जीवन अधूरा, हैप्पी गुरु पूर्णिमा।
- गुरु का साथ, जीवन की सौगात। हैप्पी गुरु पूर्णिमा।
- गुरु की वाणी -हैप्पी गुरु पूर्णिमा।
- जिसे मिला सच्चा गुरु, उसका जीवन कभी नहीं रहा अधूरा।
- गुरु वह दीपक हैं जो खुद जलकर हमें उजाला देते हैं।
अपनों को भेजें खास दोहे (Guru Purnima 2025)
- गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।
- बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।
अर्थ -कबीरदास जी कहते हैं कि अगर एक साथ मेरे सामने भगवान और गुरु खड़े हों, तो पहले मैं गुरु के चरण छूंगा क्योंकि गुरु ने ही मुझे भगवान तक पहुंचाया है। गुरु का स्थान भगवान से भी श्रेष्ठ है।
- गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिटे न मोहि।
- गुरु बिन लखे न सत्य को, गुरु बिन मिटे न लोभि।।
अर्थ -गुरु के बिना ज्ञान प्राप्त नहीं होता, न ही मोह खत्म होता है। सच्चाई को समझने के लिए और लोभ से मुक्त होने के लिए गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य है।
- बिनु सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।
- संत मिलन को जाइए, परसि जरत पाषाण।।
अर्थ -सत्संग (संतों की संगति) से ही विवेक पैदा होता है, और वह भी बिना राम की कृपा के नहीं मिलता। संतों का साथ तो पत्थर जैसे हृदय को भी पिघला देता है।
गुरु जैसा कोई दाता नहीं है (Guru Purnima 2025)
- गुरु समान दाता नहीं, याचक सिर झुकाय।
- गुरु चरणों की रज मिले, जीवन सफल बनाय।।
अर्थ -गुरु जैसा कोई दाता नहीं है। उनके सामने हर शिष्य अपना सिर झुकाता है। यदि किसी को गुरु के चरणों की रज भी मिल जाए, तो उसका जीवन सफल हो जाता है।
- धरती जैसी सहनशीलता, जल सा शीतल ज्ञान।
- गुरु हो तो ऐसा होवे, निर्मल सहज महान।।
अर्थ -सच्चा गुरु धरती की तरह सहनशील होता है, और उसका ज्ञान जल की तरह शीतल और जीवनदायी होता है। ऐसा गुरु निर्मल, सहज और महान होता है।
Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों और मान्यताओं पर आधारित हैं। वनइंडिया ऐसा कोई दावा नहीं करता है।












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