Ganesha Visarjan 2021: 'गणेश विसर्जन' आज, ये है शुभ-मुहूर्त, जानिए केवल पुरुष ही क्यों करते हैं विसर्जन?

नई दिल्ली, 19 सितंबर। आज बप्पा की विदाई का दिन है। 10 दिसंबर से शुरु हुआ गणेशोत्सव आज खत्म होने वाला है यानी कि जहां-जहां बप्पा विराजे थे, वहां से वो विदा लेंगे और आज उनका विसर्जन भी होगा। वैसे तो भक्तगण अपने प्रिय गणेश जी को कभी एक दिन कभी 5 दिन तो कभी 7-8 दिनों के लिए घर लेकर आते हैं लेकिन जो लोग पूरे 10 दिनों के लिए गणपति को अपने घर में रखते हैं वो 'गणेश विसर्जन' अनंत चतुर्दशी के ही दिन करते हैं।गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा के आगमन पर जहां लोग बहुत ज्यादा खुश होते हैं, वहीं दूसरी ओर 'गणेश विसर्जन' का दिन उनके भक्तों को भावुक करने वाला होता है।

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    जानिए 'गणेश विसर्जन' का मुहूर्त

    जानिए 'गणेश विसर्जन' का मुहूर्त

    • पहला शुभ मुहूर्त सुबह 09:11 से दोपहर 12:21 बजे तक
    • दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 01:56 से 03:32 तक
    • अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से 12:39 तक
    • शाम 04:30 से 6 बजे तक राहुकाल इस दौरान ना करें विसर्जन

    एक दिन सबको मिट्टी में ही मिल जाना है

    एक दिन सबको मिट्टी में ही मिल जाना है

    मिट्टी से ही शरीर बनता है और एक दिन मिट्टी में ही मिल जाता है और हर किसी से साथ एक दिन ऐसा ही होगा इसलिए इंसान को कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए। वैसे तो विसर्जन शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है पानी में विलीन हो जाना। गणपति जी का विसर्जन यही लोगों को संदेश देता है कि इंसान को कभी भी अपनी काया, पद और पैसे का घमंड नहीं करना नहीं चाहिए।

    खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाना है

    खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाना है

    राजा हो या रंक एक दिन सभी को ही 'पानी में विलीन' में होना है इसलिए इंसान को अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि उसके कर्म ही उसे कष्टों से मुक्ति और मोझ दिला सकते हैं। खाली हाथ आप दुनिया में आए थे और खाली हाथ ही लौटेंगे। प्रकृति से मिला शरीर एक दिन प्रकृति में ही मिल जाता है। गणेश जी घर आते हैं और उसके बाद मोहमाया फैलाते हैं और फिर सबसे विदा ले लेते हैं। इसलिए मोहमाया का त्याग एक दिन सबको छोड़ना ही पड़ता है।

    क्यों करते हैं पुरुष ही विसर्जन?

    क्यों करते हैं पुरुष ही विसर्जन?

    इसके पीछे भी खास मान्यता है, दरअसल 'विसर्जन' का अर्थ अंत से होता है। महिलाएं हृदय से काफी कोमल होती हैं और उनको प्रकृति ने जीवन देने के लिए बनाया है। ऐसे में किसी के अंत को साक्षात अपनी आंखों से देखना उनके लिए काफी कष्ट भरा होता है इसलिए उन्हें 'विसर्जन' जैसी चीजों से दूर रखा जाता है।

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