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Bakrid 2024 Namaz Time: आपके शहर में कितने बजे पढ़ी जाएगी बकरीद की नमाज? चेक करें यहां टाइम

Bakrid 2024 Namaz Time: आज पूरा देश 'बकरीद' का त्योहार पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मना रहा है। ये त्योहार मुस्लिमों के खास पर्व में से एक है, इसे 'ईद-उल-अजहा' और 'ईद ए कुर्बां' के नाम से भी संबोधित किया जाता है। इस दिन बकरे की कुर्बानी दी जाती है , फिर उसे दोस्तों, रिश्तेदारों और जरूरतमंदों के बीच बांटा जाता है।

आज के दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं और उसके बाद मस्जिदों में नमाज पढ़ते हैं। फिर एक -दूसरे को ईद की बधाई देते हैं।

Bakrid 2024 Namaz Time

घर में पकवान बनते हैं और लोग एक-दूसरे को तोहफे भी देते हैं। देश में हर जगह नमाज का टाइम अलग-अलग है। यहां देखें कि आपके शहर में किस वक्त पढ़ी जाएगी बकरीद की नमाज।

दिल्ली में नमाज का टाइम ( Delhi Namaz Time)

  • जामा मस्जिद- सुबह 7.30 बजे।
  • ईदगाह, नई दिल्ली- सुबह 7:15 बजे
  • रज़ा मस्जिद- 7:30 बजे
  • मदीना मस्जिद, मक्का मस्जिद और नूर मस्जिद- सुबह 7:45 बजे
  • हक्की मस्जिद- सुबह 7:15 बजे
  • बेलाल मस्जिद और मस्जिद-ए-फातिमा- सुबह 7.30 बजे।

आपके शहर में कब पढ़ी जाएगी नमाज ( Namz Iime)

  • नोएडा (Noida): 07:19 am
  • कोलकाता (Kolkata): सुबह 07:21 AM
  • मुंबई (Mumbai): 07:22 AM
  • वाराणसी (Varanasi): सुबह 7:29 AM
  • लखनऊ (Lucknow):सुबह 7:30 AM
  • पटना (Patna): सुबह 7:31 AM
  • हैदराबाद (Hyderabad): सुबह 7:16 AM
  • बेंगलुरु (Bengaluru): सुबह 7:22 AM
  • कानपुर (Kanpur): सुबह 7:25 AM
  • रांची (Ranchi):सुबह 7:24 AM
  • मेरठ (Meerut): सुबह 7:24 AM

कुछ खास बातें

  • बकरीद का पर्व इस्लामिक कैलेंडर Dhu al-Hijjah के 10 वें दिन यानी कि मीठी ईद के दो माह बाद मनाया जाता है।
  • ये पर्व हमें त्याग, समर्पण और प्रेम का पाठ सिखाता है।

क्या है इस पर्व की कथा?

हजरत इब्राहिम ने हमेशा मानव के कल्याण के लिए काम किया, 90 वर्ष की अवस्था में उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम ईस्माइल था। एक दिन उन्हें सपना आया कि उन्हें मानव जाति के कल्याण के लिए कुर्बानी देनी होगी वो भी अपने प्रिय चीज की।

उन्होंने खुदा की बात मानते हुए अपने बेटे को कुर्बान करने का फैसला किया, उनके हाथ ना कांपे इसलिए उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और उसी कुर्बानी दे दी लेकिन जब उन्होंने पट्टी खोली तो देखा कि बलि वेदी पर उनका बेटा नहीं, बल्कि दुंबा (बकरा) था और उनका बेटा सामने स्वस्थ खड़ा था और तब से ही ये दिन कुर्बानी का दिन बन गया।

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