Dussehra 2025: क्या है आयुध पूजा और दशहरा का कनेक्शन? जानें महत्व और खास बातें
Dussehra 2025 : भारत में हर त्योहार का अपना धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व है। नवरात्रि और दशहरे के अवसर पर मनाई जाने वाली आयुध पूजा (Ayudha Puja) विशेष रूप से दक्षिण भारत में अत्यंत लोकप्रिय है। यह पर्व शक्ति, पराक्रम और साधनों के महत्व को दर्शाता है। आयुध पूजा आज मनाई जा रही है। गौरतलब है कि यह पूजा आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि (नौवें दिन) को मनाई जाती है।

आयुध पूजा 2025: तिथि और समय
शुभ विजय मुहूर्त दोपहर 2:09 बजे से 2:57 बजे के बीच है।
आयुध पूजा का महत्व (Dussehra 2025)
आयुध पूजा का अर्थ है - 'आयुधों की पूजा'। आयुध का मतलब केवल हथियारों से नहीं बल्कि उन सभी साधनों से है जिनका उपयोग हम अपने जीवन और कार्य में करते हैं। प्राचीन काल में यह पूजा विशेषकर योद्धाओं और सैनिकों द्वारा अपने शस्त्रों की होती थी। आज के समय में किसान अपने कृषि उपकरणों, विद्यार्थी अपनी पुस्तकों, और व्यापारी अपने कार्य साधनों की पूजा करते हैं।
पूजा विधि (Dussehra 2025)
इस दिन शस्त्र, औज़ार, वाहन या कार्य में आने वाले उपकरणों को साफ किया जाता है। उन्हें फूल, हल्दी, कुमकुम और चंदन से सजाया जाता है। नारियल और फल अर्पित कर दीपक जलाया जाता है।फिर देवी दुर्गा और भगवान विष्णु का स्मरण करके उन साधनों से सफलता और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है।
दशहरा और आयुध पूजा का कनेक्शन (Dussehra 2025)
आयुध पूजा का सीधा संबंध दशहरे से है। नवरात्रि की नवमी तिथि को आयुध पूजा की जाती है और अगले दिन विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाता है। दशहरा असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। वहीं, देवी दुर्गा ने महिषासुर पर विजय पाई थी।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से जरूर बात करें।












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