Dubadi Saate 2021: दुबड़ी साते व्रत आज, जानिए खास बातें

नई दिल्ली, 10 सितंबर। हिंदू धर्म शास्त्रों में उत्तम संतान की प्राप्ति से लेकर संतान की रक्षा तक के लिए अनेक व्रतों का उल्लेख मिलता है। इनमें से ही एक प्रमुख व्रत है दुबड़ी साते व्रत। यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन किया जाता है। इस दिन संतान की रक्षा के लिए महिलाएं व्रत रखकर पूजन करती हैं और दुबड़ी साते की कथा सुनती हैं। यह व्रत उत्तर भारत के अनेक प्रदेशों में प्रमुखता से किया जाता है।

संतान की रक्षा के लिए 13 सितंबर को होगा दुबड़ी साते व्रत

कैसे करते हैं दुबड़ी साते का पूजन

एक चौकी पर बच्चों की मूति, सर्प की मूर्ति, एक औरत और एक मटका मिट्टी से बना लें। इन सभी का पूजन, जल, दूध, चावल, रोली, आटा, घी, शक्कर मिलाकर उनकी लोई बनाकर उससे पूजें। दक्षिणा अर्पित करें। भीगा हुआ बाजरा भी चढ़ाएं। मोठ और बाजरे का बायना निकालकर सास को देकर पांव छुएं। फिर कहानी सुनकर ठंडा भोजन करें। संतान की रक्षा और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करें।

व्रत कथा

एक साहूकार के सात बेटे थे। जब भी वह किसी बेटे का विवाह करता तो बेटा मर जाता। एक-एक करके उसके छह बेटे मर गए। एक दिन छोटे बेटे के विवाह की बात चली। बात पक्की हो गई। लड़के की बुआ शादी में शामिल होने आ रही थी तो रास्ते में उसे एक बुढ़िया मिली। बुढ़िया ने बुआ से पूछा कितुम कहां जा रही हो तो बुआ ने कहा मैं अपने भतीजे की शादी में जा रही हूं। परंतु मेरे छह भतीजे विवाह होते ही मर गए, यह सातवां हैं। यह सुनकर बुढ़िया बोली- वह तो विवाह के लिए घर से बाहर निकलते ही मर जाएगा। अगर बच गया तो रास्ते में एक पेड़ के नीचे दबकर मर जाएगा। अगर वहां भी बच गया तो ससुराल में दरवाजा गिरने से दबकर मर जाएगा। अगर वहां भी बच गया तो सातवें भांवर पर सर्प के काटने से मर जाएगा।

'तुम लड़के को पीछे के दरवाजे से निकालना'

यह सुनकर बुआ बोली- मां बचने का कोई उपाय है क्या? बुढ़िया बोली- तुम लड़के को पीछे के दरवाजे से निकालना, पेड़ के नीचे मत बैठने देना, ससुराल में भी पीछे के दरवाजे से ले जाना। भांवर के समय कच्चे करवे में कच्चा दूध और गरम लकड़ी लेकर बैठ जाना। जब भांवर पड़े और डसने के लिए सांप आए तो सर्प के आगे करवा रख देना और जब सर्प दूध पीने लगे तो सर्प के गले को गर्म लकड़ी से दाग देगा। बाद में सांपिन आएगी और सांप को मांगेगी, तब तुम उससे अपने छह भतीते मांग लेना, वह उन्हें जीवित कर देगी। यह बात किसी को बताना नहीं, नहीं तो तुम और सुनने वाला दोनों मर जाओगे और लड़का भी मर जाएगा। बुआ ने बुढ़िया के बताए अनुसार सब वैसा ही किया। अंत में नागिन आई और बुआ ने अपने छह भतीजों को जीवित करने की मांग की। नागिन ने उसके सभी भतीजों को जिंदा कर दिया।

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