'जाति-व्यवस्था अमेरिकी नस्लभेद से खतरनाक'

Indian caste system
भारत में जाति व्यवस्था पर फिल्म बनाने आई एक अमेरिकी वृत्तचित्र निर्माता का कहना है कि भारतीय समाज में जाति व्यवस्था की पैठ बिलकुल जड़ों तक है लेकिन कोई इस पर बात नहीं करना चाहता। सभी लोग किसी न किसी रूप में इस पर यकीन भी करते हैं।

न्यूयार्क की वृत्तचित्र निर्माता और चलचित्रकार क्रिस्टीना वोरोस कहती हैं, "मुझे इसका एहसास यात्रा की शुरुआत में ही हो गया। जब मैं इसके बारे में तथ्य जुटा रही थी तब मुझे लगा कि यह अमेरिका के नस्लभेद से भी ज्यादा खतरनाक है। यहां यह समाज के एकदम निचले सिरे पर मौजूद है और सभी इसे मानते हैं लेकिन कोई इस पर बात नहीं करना चाहता।"

वोरोस ने कहा, "कल्पना कीजिए आंध्रप्रदेश में एक जोगिनी (देवता से ब्याही लड़की) के बच्चे अपने नाम के आगे देवता का नाम लगाते हैं। उनमें से अधिकांश इससे नफरत करते हैं। मैंने ऐसी कई जोगिनियों से बात की। वे इससे समझौता कर चुकी हैं।" गौरतलब है कि समाजशास्त्री इसे एक तरह की वेश्यावृत्ति मानते हैं।

वोरोस न्यूयार्क की टर्टल फिल्म्स प्रोडक्शन हाउस के साथ काम कर रही हैं जो अमेरिका में विचारोत्तेजक वृत्तचित्र बनाने का काम करती है। अपने सहयोगी और निर्देशक सर्जेई क्रासिकाउ के साथ वोरोसा इस समय महाराष्ट्र में जाति व्यवस्था की पड़ताल कर रही हैं।

वे दोनों नांदेड़ जाने की भी योजना बना रहे हैं जहां पिछले दिनों ऊंची जाति के लोगों ने दो दलित युवकों की आंखें फोड़ दी थीं।

गौरतलब है कि इस प्रोडक्शन हाउस को शिकागो फिल्म समारोह समेत कई प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में पुरस्कार मिल चुके हैं।

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