Diwali 2018: जानिए दिवाली से जुड़े कुछ चौंकाने वाली बातें...
नई दिल्ली। 19 अक्टूबर को हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक दिवाली का पर्व है , लोगों के घरों में अभी से इस त्योहार के लिए तैयारियां चल रही हैं।
लेकिन क्या आपको पता है कि दिवाली का त्योहार क्यों औऱ किस लिए मनाया जाता है और क्या है इस पर्व का महत्व, अगर नहीं तो चलिए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी खास बातें...
- 'दिवाली' संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है और वो दो शब्द हैं 'दीप' अर्थात 'दीपक' और 'आवली' अर्थात 'लाइन' या 'श्रृंखला' जिसका मतलब हुआ 'दीपकों की श्रृंखला'।
- दीपक को स्कन्द पुराण में सूर्य के हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाला माना गया है।

यम और नचिकेता
- देश के कुछ हिस्सों में हिन्दू दीवाली को यम और नचिकेता की कथा के साथ भी जोड़ते हैं।
- 7 वीं शताब्दी के संस्कृत नाटक नागनंद में राजा हर्ष ने इसे दीपप्रतिपादुत्सव: कहा है जिसमें दिये जलाये जाते थे और नव दुल्हन और दूल्हे को तोहफे दिए जाते थे।
- फारसी यात्री और इतिहासकार अल बरूनी, ने 11 वीं सदी के संस्मरण में, दीवाली को कार्तिक महीने में नये चंद्रमा के दिन पर हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार कहा है।
- जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है।
- दीपावली नेपाल में भी मनाया जाता है । नेपालियों के लिए यह त्योहार इसलिए महान है क्योंकि इस दिन से नेपाल संवत में नया वर्ष शुरू होता है।
- कई लोग दीपावली को 14 साल के वनवास पश्चात भगवान राम व पत्नी सीता और उनके भाई लक्ष्मण की वापसी के सम्मान के रूप में मानते हैं।
- प्राचीन हिन्दू महाकाव्य महाभारत अनुसार कुछ दीपावली को 12 वर्षों के वनवास व 1 वर्ष के अज्ञातवास के बाद पांडवों की वापसी के प्रतीक रूप में मानते हैं।
- कई हिंदु दीपावली को भगवान विष्णु की पत्नी, धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी से जुड़ा हुआ मानते हैं।
- दीपावली की रात वह दिन है जब लक्ष्मी ने अपने पति के रूप में विष्णु को चुना और फिर उनसे शादी की।
- लक्ष्मी के साथ-साथ भक्त बाधाओं को दूर करने के प्रतीक गणेश; संगीत, साहित्य की प्रतीक सरस्वती; और धन प्रबंधक कुबेर को प्रसाद अर्पित करते हैं[
- कुछ दीपावली को विष्णु की वैकुण्ठ में वापसी के दिन के रूप में मनाते है।
- मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं और जो लोग उस दिन उनकी पूजा करते है वे आगे के वर्ष के दौरान मानसिक, शारीरिक दुखों से दूर सुखी रहते हैं।

बंदी छोड़ दिवस

भाई लक्ष्मण की वापसी

भगवान विष्णु की पत्नी

विष्णु की वैकुण्ठ में वापसी













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