Dhumavati jayanti 2021: कौन हैं मां 'धूमावती', क्यों उन्हें विधवा के रूप में पूजा जाता है?
नई दिल्ली, 17 जून। 'धूमावती जयंती' आज मनाई जा रही है। यह पर्व हर साल ज्येष्ठ शुक्ल की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। भगवान शिव द्वारा प्रकट की गई दस महाविद्याओं में सातवें स्थान पर मां 'धूमावती' का नाम आता है। धूमावती देवी पार्वती का एक रूप हैं। इनकी सवारी कौवा है, ये सफेद वस्त्र धारण करती हैं और अपने केश खुले रखती हैं। इन्हें विधवा के रूप में पूजा जाता है। इनका रूप बहुत क्रूर और भयानक है।

धूमावती जयंती पर कीजिए इन मंत्रों से पूजा
- ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्
- ॐ धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात
- धूम्रा मतिव सतिव पूर्णात सा सायुग्मे, सौभाग्यदात्री सदैव करुणामयि:
- धूं धूं धूमावती ठ: ठ:
स्तुति
विवर्णा चंचला कृष्णा दीर्घा च मलिनाम्बरा,
विमुक्त कुंतला रूक्षा विधवा विरलद्विजा,
काकध्वजरथारूढा विलम्बित पयोधरा,
सूर्पहस्तातिरुक्षाक्षी धृतहस्ता वरान्विता,
प्रवृद्वघोणा तु भृशं कुटिला कुटिलेक्षणा,
क्षुत्पिपासार्दिता नित्यं भयदा काल्हास्पदा।
कथा
दरअसल मां धूमावती की पूजा एक विधवा के रूप में होती है। इसके पीछे एक कथा है। माना जाता है कि धूमावती , मां पार्वती का रूप हैं, एक बार वो महादेव जी के साथ बैठी थीं, तो उन्हें बहुत तेज भूख लगी। उन्होंने महादेव से कहा कि उन्हें भोजन चाहिए तुरंत तब महादेव ने कहा कि अभी थोड़ी देर में भोजन करते हैं लेकिन धूमावती को भूख बर्दाश्त नहीं हो रही थी इस वजह से वो हठ करने लगीं और इस पर महादेव को गुस्सा आ गया और उन्होंने भड़कते हुए कहा कि तुम मुझे निगल लो, बस भगवान की आज्ञा मानकर धूमावती ने महादेव को खा लिया। चूकिं महादेव तो नीलकंठ हैं, उनके गले में विष है, ऐसे में धूमावती ने जैसे ही शिव को निगला, उनके शरीर से धुआं निकलने लगा और उन्होंने एकदम विकराल रूप धारण कर लिया। उन्हें शिव जी का श्राप लगा और इसी वजह से उनकी पूजा विधवा के रूप में होती है।












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