Dev Uthani Ekadashi 2021: 'देवउठनी एकादशी' पर भगवान विष्णु की करें विशेष आरती, पूरी होगी हर इच्छा
नई दिल्ली, 12 नवंबर । कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'देवउठनी एकादशी' कहते हैं। इस तिथि के बाद से ही सारे शुभ काम शुरू हो जाता है। इस बार ये एकादशी 14 नवंबर को आ रही हैं। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा करनी चाहिए। इसके लिए उनकी विशेष आरती होनी चाहिए। ऐसा करने से भक्त के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

- ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता ।
- विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ॐ।।
- तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
- गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।ॐ।।
- मार्गशीर्ष के कृ्ष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी का जन्म हुआ।
- शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ॐ।।
- पौष के कृ्ष्णपक्ष की, सफला नामक है,
- शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ॐ ।।
- नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
- शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ॐ ।।
- विजया फागुन कृ्ष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
- पापमोचनी कृ्ष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ॐ ।।
- चैत्र शुक्ल में नाम कामदा,
- धन देने वाली,
- नाम बरुथिनी कृ्ष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ॐ ।।
- शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृ्ष्णपक्षी,
- नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ॐ ।।
- योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृ्ष्णपक्ष करनी।
- देवशयनी
- नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरी ।। ॐ ।।
- कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
- श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ॐ ।।
- अजा भाद्रपद कृ्ष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
- इन्द्रा आश्चिन कृ्ष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ॐ ।।
- पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
- रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ॐ ।।
- देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दु:खनाशक मैया।
- पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ॐ ।।
- परमा कृ्ष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।
- शुक्ल मास में होय "पद्मिनी दु:ख दारिद्र हरनी ।। ॐ ।।
- जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
- जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।। ॐ ।।
विष्णु स्तुति :-
- शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
- विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम्।
- लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
- वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम्।।
- यं ब्रह्मा वरुणैन्द्रु रुद्रमरुत: स्तुन्वानि दिव्यै स्तवैवेदे:।
- सांग पदक्रमोपनिषदै गार्यन्ति यं सामगा:।
- ध्यानावस्थित तद्गतेन मनसा पश्यति यं योगिनो
- यस्यातं न विदु: सुरासुरगणा दैवाय तस्मै नम:।।
मंत्र
- ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
- ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।
- ॐ आं संकर्षणाय नम:
- ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:
- ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:












Click it and Unblock the Notifications