Dev Uthani Ekadashi 2017: जानिए पूजा का मुहूर्त, विधि और महत्व
नई दिल्ली। आषाढ़ माह की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक साल 24 एकादशियां होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। आषाढ शुक्ल एकादशी को देव-शयन हो जाने के बाद से प्रारम्भ हुए चातुर्मास का समापन कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन देवोत्थान-उत्सव होने पर होता है। इस दिन घरों में गन्ने की पूजा के साथ तुलसी-विष्णु की विवाह के लिए मंडप सजाया जाता है। इस दिन ही मां तुलसी का विवाह भगवान सालिगराम (विष्णु जी) के साथ होता है, जिसके लिए पुराणों में एक कथा भी है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु जी भी इस दिन चार माह के शयन के बाद उठते हैं इसलिए इसे देवउठनी के नाम से जाना जाता है।

पूजा मुहूर्त
आज एकादशी की तिथि शाम 6 बजकर 55 मिनट तक है इसलिए इस दौरान ही तुलसी विवाह हो जाना चाहिए। पारण करने का शुभ समय 1 नवंबर को सुबह 06 बजकर 37 मिनट से शुरु होकर सुबह के 08 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
कैसे करें पूजा..
भगवान विष्णु को चार मास की योग-निद्रा से जगाने के लिए घण्टा, शंख, मृदंग आदि वाद्यों की मांगलिक ध्वनि के बीचये श्लोक पढकर जगाते हैं
उत्तिष्ठोत्तिष्ठगोविन्द त्यजनिद्रांजगत्पते। त्वयिसुप्तेजगन्नाथ जगत् सुप्तमिदंभवेत्॥
उत्तिष्ठोत्तिष्ठवाराह दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।
हिरण्याक्षप्राणघातिन्त्रैलोक्येमङ्गलम्कुरु॥
- संस्कृत बोलने में असमर्थ सामान्य लोग-उठो देवा, बैठो देवा कहकर श्रीनारायण को उठाएं।
- श्रीहरिको जगाने के पश्चात् उनकीपूजा करें। संभव हो तो उपवास रखें अन्यथा केवल एक समय फलाहार ग्रहण करें। इस एकादशी में रातभर जागकर हरि नाम-संकीर्तन करने से भगवान विष्णु अत्यन्त प्रसन्न होते हैं।












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