Dev Deepawali 2025: आज देव दीपावली, क्या है पूजा विधि, मुहूर्त और मान्यता?
Dev Deepawali 2025 : हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को दीपों का पर्व यानी कि 'देव दीपावली' मनाया जाता है। ये दीवाली के लगभग 15 दिन बाद आता है। इसे 'देवताओं की दीपावली' भी कहा जाता है। आज ये पावन दिन आया है दरअसल इस बार कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर को 10:48 PM से शुरू हुई थी और इसका समापन 05 नवंबर को 6:48 PM पर होगा।

उदयातिथि मान्य होने की वजह से 05 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा मनाई जा रही है। इस दिन गंगा के घाटों पर दीपों की अद्भुत छटा देखने लायक होती है, तो वहीं पूजा का शुभ मुहूर्त 05 नवंबर को 05:15 PM से 7:50 PM तक का है।
Dev Deepawali 2025 का कारण और धार्मिक मान्यता
हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन देवता स्वयं स्वर्गलोक से पृथ्वी पर आकर गंगा स्नान करते हैं, इसलिए इसे देवताओं की दीपावली कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जब भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया, तब सभी देवताओं ने प्रसन्न होकर काशी में दीप जलाकर उनकी स्तुति की, उसी दिन से यह परंपरा चली आ रही है कि कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं के स्वागत में दीप प्रज्वलित किए जाएं।
Dev Deepawali 2025 का इतिहास
पुराणों में वर्णन है कि भगवान शिव ने इस दिन त्रिपुरासुर का संहार किया, जिसके बाद देवताओं ने काशी में गंगा किनारे दीप जलाकर विजय उत्सव मनाया था, तब से यह दिन 'त्रिपुरारी पूर्णिमा' के नाम से भी प्रसिद्ध हुआ। वाराणसी में यह पर्व विशेष रूप से दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, पंचगंगा घाट और राजेंद्र प्रसाद घाट पर अत्यंत भव्य रूप से मनाया जाता है।
Dev Deepawali 2025 का महत्व
यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।यह भगवान शिव की त्रिपुरासुर पर विजय का स्मरण कराता है। इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और दान-पुण्य करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।यह पर्व भक्तों के मन में भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मकता का संचार करता है।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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