Dasha mata Puja 2023: आज है दशामाता पूजन, जानिए इसके लाभ
Dasha mata Puja Significance: अपने नाम के अनुरूप यह व्रत-पूजा मनुष्य के परिवार की दशा को सुधार देता है और कुटुंब में सुख-शांति निवास करती है।

Dasha mata Puja 2023: हिंदू धर्म में अनेक ऐसे व्रत-त्योहार, पर्व-पूजन बताए गए हैं जो मनुष्य की सुख-संपन्नता के लिए होते हैं। उन्हीं में से एक है दशामाता पूजन। चैत्र कृष्ण दशमी के दिन आने वाला दशामाता पर्व, अनेक राज्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इस दिन घर-परिवार की सुख-संपन्नता के लिए भगवान विष्णु की पूजा पीपल के रूप में करने का विधान है। इस बार दशामाता पूजन 17 मार्च 2023 शुक्रवार को किया जाएगा।
कैसे करते हैं दशामाता का पूजन
दशामाता पूजन में भगवान विष्णु के स्वरूप पीपल वृक्ष को पूजा जाता है। इस दिन महिलाएं कच्चे सूत का 10 तार का डोरा बनाकर उसमें 10 गांठ लगाती हैं और पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसकी पूजा करती हैं। वृक्ष के नीचे बैठकर नल दमयंती की कथा सुनती हैं। इसके बाद परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए डोरा अपने गले में बांधती हैं। घर आकर मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर हल्दी कुमकुम के छापे लगाती है। इस दिन व्रत रखा जाता है और एक समय भोजन किया जाता है। भोजन बिना नमक का किया जाता है। इस दिन प्रात: जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करके सारा कचरा बाहर फेंक दिया जाता है। इस दिन किसी को पैसा उधार नहीं देना चाहिए। दशामाता पूजा के दिन बाजार से कोई वस्तु नहीं खरीदी जाती है। जरूरत की वस्तुएं एक दिन पूर्व ही लाकर रख ली जाती है।
दशामाता पूजन के लाभ
- दशामाता का पूजन मुख्यत: घर की बिगड़ी दशा सुधारने के लिए किया जाता है। यदि मेहनत करने के बाद भी घर में धन का अभाव बना हुआ है। आय से अधिक खर्च हो रहा है तो दशामाता पूजन अवश्य करना चाहिए।
- घर में रोग ही रोग हो। कोई न कोई सदस्य लगातार बीमार रहता हो। तो ऐसी स्थिति में दशामाता का पूजन रोग दूर करता है और रोगों पर हो रहे खर्च को बचाता है।
- कई बार भाग्य की रूकावटें रहती हैं। भाग्य चमक नहीं पाता, घर के युवक-युवतियों के विवाह में बाधा आ रही हो। दंपतियों को संतान की प्राप्ति नहीं हो पा रही है तो दशामाता का पूजन करने से इस तरह के सारे संकट और बाधाएं दूर हो जाती हैं।












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